गुलरिहा इलाके के जैनपुर गांव के टोला प्यारेपुर में पोखरे में उतराता मिला नवजात का शव
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, पोस्टर्म रिपोर्ट के बाद ही करेगी कोई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वह नवजात न कुछ बोल सकता था, न कुछ समझ सकता था। जब तक वो नौबत आती उससे पहले ही उसका अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया। यदि वह बोल सकता तो जरूर पूछता कि मां, बेबसी में मुझे तालाब में फेंक दिया या तुम्हारी ममता ही सूख गई थी? इतनी निर्मम हो गई कि अपने कॉलेजे के टुकड़े को इस तरह से मरने के लिए फेंक दिया।
दरअसल, रविवार की रात करीब नौ बजे गुलरिहा थाना क्षेत्र के जैनपुर गांव के टोला प्यारेपुर में तालाब में एक नवजात का शव उतरता मिला। उसे प्लास्टिक में लपेटकर फेंक दिया गया था। लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मौत की वजह जानने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस संबंध में तरह -तरह की चर्चाएं हैं।
जैनपुर गांव के टोला प्यारेपुर के जिस तालाब में नवजात का शव मिला उसमें मछली पालन किया जाता है। रविवार की रात रखवाली के लिए पहुंचे युवक ने तालाब में प्लास्टिक तैरती देखी तो उसे आशंका हुई कि मछलियों को मारने के लिए किसी ने जहर डाल दिया है। जांच के लिए उसने प्लास्टिक को पानी से बाहर निकाला तो यह देखकर दंग रह गया। उसमें एक नवजात का शव था। युवक डर गया। उसकी चीखें निकल गई। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने आसपास के लोगों से नवजात के शव के बारे में जानकारी जुटानी चाही, लेकिन कोई कुछ नहीं बता पाया। प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह ने बताया कि जांच कराई जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों का पता चलेगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इन धाराओं में केस दर्ज कर होनी चाहिए कार्रवाई
धारा 315 आईपीसी : शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य।
सजा : दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दंड
धारा 317 आईपीसी : माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की कैद या फिर जुर्माना या फिर दोनों
धारा 318 आईपीसी : नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है।
सजा : दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों।
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पीपीगंज में मौत के घाट उतारा गया था नवजात
कथित लोकलाज से बचने के लिए नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। ऐसे ही एक नवजात पीपीगंज इलाके में मिला था। मामले में 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाना पुलिस ने की थी। इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया था। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ। बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली किशोरी मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी 2020 को गिरफ्तार किया था।
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बड़हलगंज में भी हुई थी नवजात की हत्या
5 जनवरी 2022 को बड़हलगंज पुलिस ने नवजात का शव मिलने पर केस दर्ज किया था। जांच में पता चला कि एक युवती बिन ब्याही मां बनी थी। पुलिस ने इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या और दुष्कर्म की धारा को बढ़ा दिया था। बाद में पता चला कि बिन ब्याही मां की मां ने ही पटककर नवजात को मारा था। पुलिस ने प्रेमी को दुष्कर्म और मां-बेटी को हत्या के आरोप में जेल भेजा था।
खबर 2
संशोधित::
अनाथालय में जीवन काटा, मौत पर भी कोई पूछने नहीं आया
- बीमारी से हुई मौत, पिता ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर न आने की बात कही
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अनाथालय में रह रही 13 साल की बालिका की शनिवार को मौत हो गई। लालन-पालन से मुंह मोड़ने वाले माता-पिता को उसकी मौत पर भी तरस नहीं आया। अनाथालय की ओर से सूचना देने के बावजूद पिता शव को लेने नहीं आए। न ही उन्होंने उसका अंतिम संस्कार ही किया। इसके बाद प्रोविडेंस होम के संचालक ने पुलिस को सूचना दी और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद जिले के घकना नई बस्ती निवासी एक व्यक्ति की 13 वर्षीय बेटी 18 अप्रैल 2016 से बाल कल्याण समिति गोरखपुर के निर्देश पर गुलरिहा के जंगल एकला नंबर दो स्थित प्रोविडेंस होम में रह रही थी। वह मानसिक रूप से बीमार थी। शनिवार शाम बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई। उसकी मौत की सूचना पिता को दी गई लेकिन वह नहीं आए। इसके बाद प्रोविडेंस होम के कर्मचारी संजय मैसी की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस शव काे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।