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Gorakhpur News: राजस्थान व ओडिशा से मंगा रहे स्मैक-गांजा, 'फ्रेंचाइजी', बेच रहे शहर के 'स्टॉकिस्ट'- जानें कैसे

Wed, 12 Jun 2024 11:06 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

पुलिस की पूछताछ में पता चला कि जितेंद्र इंटर फेल होने के बाद एक आयुर्वेद कॉलेज से कोई कोर्स किया। इसके बाद वह कंपाउंडर का काम करने लगा। लोग उसे डॉक्टर बुलाने लगे। वह रुपये कमाने के लिए स्मैक की तस्करी में लिप्त हो गया।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में बड़ी कंपनियों की तरह स्मैक और गांजा की फ्रेंचाइजी दी जाती थी। राजस्थान और ओडिशा से माल लाकर यहां एक जगह स्टॉक किया जाता था। धंधे से जुड़े लोग वहां से उसे जगह-जगह पहुंचाते थे। यहां किशुन कुमारी उर्फ पंडिताइन कभी स्मैक और गांजा के धंधे की कमान संभाला करती थी।
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वर्तमान फ्रेंचाइजी की कमान मंजू, सोनी और डॉक्टराइन संभाल रही हैं। डॉक्टराइन कौन है, पुलिस इसका पता कर रही है। यह खुलासा कुख्यात शातिर तस्कर मऊ जिले के घोसी स्थित पिहड़ सिंहपुर निवासी डॉक्टर उर्फ जितेंद्र पासवान की गिरफ्तारी के बाद हुआ।

सोमवार को गिरफ्तारी के बाद स्मैक किंग डॉक्टर उर्फ जितेंद्र ने कई राज पुलिस के सामने उगले हैं। डॉक्टर ने यूपी के अलावा अन्य प्रदेशों में स्मैक के धंधे में लिप्त बड़े तस्करों के नाम बताए हैं जिनके पकड़े जाने के बाद बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है। पुलिस टीम अब उन्हें दबोचने में जुट गई है।
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पकड़ा गया डॉक्टर राजघाट थाने में एक मामले में छह माह से वांछित था। वह खोराबार थाना क्षेत्र के सिक्टौर में एक निजी स्कूल के पास किराए के मकान में रहता था। उसने पुलिस को बताया कि जब पंडिताइन काम करती थी, तब एक दिन में 50 लाख से भी अधिक कीमत की स्मैक आती थी, क्योंकि यहां इसकी खपत अधिक थी।

कार्रवाई के बाद यहां पर धंधा मंदा पड़ गया। अब बहुत कम मात्रा में चोरी-चुपके माल आ रहा है, लेकिन सेंटर आज भी अमरूतानी ही है।

डॉक्टर की मानें तो पहले अमरूतानी ही स्मैक और गांजा का मुख्य सेंटर था। वर्तमान में सख्ती के बाद खपत कम जरूर हुई, लेकिन अमरूतानी के आसपास की बस्तियों में कई घरों में नशे का सामान आज भी चोरी-चुपके बेचा जा रहा है।

इस तरह पड़ा डॉक्टर नाम
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि जितेंद्र इंटर फेल होने के बाद एक आयुर्वेद कॉलेज से कोई कोर्स किया। इसके बाद वह कंपाउंडर का काम करने लगा। लोग उसे डॉक्टर बुलाने लगे। वह रुपये कमाने के लिए स्मैक की तस्करी में लिप्त हो गया।

इस तरह आता है स्मैक और गांजा
रोडवेज की बसों से एक बार में तस्कर 100 ग्राम स्मैक करीब पांच लाख कीमत का लाते हैं।
100 ग्राम स्मैक में तस्कर को 50 हजार रुपये का फायदा होता है।

100 ग्राम स्मैक से बनती है 10 हजार पुड़िया, एक पुड़िया 250 रुपये में बिकती है।
ट्रक चालकों से सेटिंग कर एक बार में 10 किलो गांजा करीब एक लाख कीमत का लाते हैं।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि मऊ जिले का डॉक्टर उर्फ जितेंद्र की काफी दिनों से तलाश थी। कई बार गांजा, स्मैक पकड़े जाने पर डॉक्टर का नाम आता था, लेकिन कौन है यह पता नहीं चल पाता था। पकड़ में आने के बाद तस्कर ने कई बड़े तस्करों के नाम बताए हैं, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।


 
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