गोरखपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बुधवार को जयंती योग में श्रद्धा पूर्वक मनाई जाएगी। वहीं वैष्णव लोग जन्माष्टमी बृहस्पतिवार को मनाएंगे।
शहर में घरों के साथ ही गोपाल मंदिर, जलकल, जिला कारागार में बुधवार को, वहीं गोरखनाथ मंदिर, गीता वाटिका, पुलिस लाइंस आदि जगहों पर बृहस्पतिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसे लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंगलवार को दिनभर जलकल, आरपीएफ, पुलिस लाइंस आदि जगहों पर झांकियों और पंडालों की सजावट का काम चलता रहा।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण सप्तमी तिथि का मान शाम सात बजकर 58 मिनट तक पश्चात अष्टमी है। इस दिन कृत्तिका नक्षत्र भी दिन में दो बजकर 39 मिनट तक पश्चात रोहिणी नक्षत्र संपूर्ण रात्रि है। 30 वर्ष बाद इस वर्ष जयंती योग बन रहा है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के समय अर्ध रात्रि में हुआ था। इस वर्ष अष्टमी, बुधवार और रोहिणी नक्षत्र का योग होने से जयंती नामक योग बन रहा है, जो महापुण्य दायक माना गया है।
इस तरह करें व्रत-पूजन
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नानादि के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमश: लेना चाहिए। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। दूसरे दिन सुबह स्नानादि पूजन-अर्चन कर ब्राह्मण को दान देकर व्रत का पारण करें।