विश्व नर्स दिवस
बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला और महिला अस्पताल में नर्साें की कमी
इसकी वजह से मरीजों का सही तरीके से नहीं हो पा रहा देखभाल
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले में डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सों की कमी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नर्साें का काफी कमी है। यही कारण है कि मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होने के बाद तीमारदार उनका ख्याल रखते हैं। जबकि, नियम से जनरल वार्ड में छह बेड पर एक नर्स का होना जरूरी है।
बात करें आईसीयू की तो एक बेड पर एक नर्स, हाई डिफेंसिव यूनिट के एक बेड पर एक, इसी तरह डायलिसिस के एक बेड पर एक नर्स का होना जरूरी है। लेकिन, यह मानक जिले के किसी भी सरकारी संस्थान में नहीं पूरे हो रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बात करें तो 50 मरीजों पर एक नर्स उपलब्ध है।
वहीं, आईसीयू के 10 बेड पर एक नर्स, हाई डिफेंसिव यूनिट के आठ बेड पर एक नर्स और डायलिसिस के 10 बेड पर एक नर्स हैं। बीआरडी में कुल 400 के आसपास नर्स हैं, जो मरीजों की सेवा में लगी हैं। जबकि, जरूरत करीब 850 की है। इसी तरह जिला अस्पताल की बात करें तो यहां भी यही हालत है। 20 बेड पर एक नर्स उपलब्ध हैं।
बच्चों के 17 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड में दो नर्साें से काम चलाया जा रहा है। जबकि, यहां 300 बेड हैं। इसके मुताबिक, करीब 200 नर्साें की जरूरत है। इसी तरह महिला अस्पताल में भी नर्साें की कमी है। सीएचसी और पीएचसी की स्थिति तो ज्यादा खराब है।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि नर्साें की कमी है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि बेड की तुलना में जितनी नर्सें होनी चाहिए, उतनी नहीं है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।