आरएमआरसी के निदेशक जी-20 देशों की बैठक में हुए शामिल
जी-20 देशों में बच्चों को लगाए जा रहे हैं दर्द रहित टीके और बिना निडिल वाले इंजेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) जी-20 में शामिल देशों की संस्थाओं के साथ मिलकर वैक्सीन डेवलेपमेंट, ड्रग्स एंड डायग्नोस्टिक और संक्रामक बीमारी रोकने की दिशा में शोध और अन्य कार्य करेगा। आरएमआरसी की टीम दर्द रहित टीके और जेट इंजेक्टरों पर भी काम करेगी। हैदराबाद में जी-20 हेल्थ वर्किंग ग्रुप (स्वास्थ्य कार्य समूह) की बैठक में यह फैसला लिया गया है।
आरएमआरसी के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने बताया कि पहली बार जी-20 में आरएमआरसी भी शामिल हुआ है। बैठक में संक्रामक बीमारियों, बेक्टर बॉर्न डिजीज, टीबी, सहित अन्य वायरस जनित बीमारियों पर चर्चा हुई। बताया कि बेक्टर बॉर्न डिजीज में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियां शामिल हैं। ये बीमारियां दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों में भी है। इन देशों में आरएमआरसी की टीम जाएगी और इनके पनपने का कारण जानेगी।
यह भी देखा जाएगा कि भारत में पनपने वाले बैक्टीरिया और वायरस का उन देशों में भी तो नहीं है। इस पर शोध किया जाएगा। बताया कि जी-20 देशों में पेनलेस टीका और निडिल वाला इंजेक्शन नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल हैं। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि कुछ दवाएं ऐसी हैं, जो भारत के साथ जी-20 देशों में भी उपयोग में लाई जाती हैं। इनका असर अलग-अलग देशों में किस तरह से हो रहा है, इसे भी देखा जाएगा।
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इन देशों के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी और वैज्ञानिक हुए शामिल
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि स्वास्थ्य कार्य समूह की बैठक में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, टर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बड़े स्वास्थ्य अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए।