माफिया अजीत शाही का गैंग डी-4, वर्ष 2010 में पुलिस में रजिस्टर्ड है। माफिया के ऊपर पहला केस 1991 में मारपीट और धमकी का दर्ज हुआ था। उसके बाद शहर के कैंट, खोराबार, शाहपुर, गुलरिहा, गोरखनाथ और खामपार दिवरिया मिलाकर कुल 33 मुकदमें दर्ज हैं। अंतिम मुकदमा वर्ष 2016 में खोराबार थाने में दर्ज हुआ था। इन मुकदमों में से कई में माफिया अजीत शाही कोर्ट से बरी भी हो चुका है।
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पुलिस रिकार्ड में माफिया अजीत शाही को अब तक किसी मामले में पुलिस सजा नहीं दिला पाई है। योगी सरकार आने के बाद माफिया ने खुद को क्राइम से दूर कर लिया था। हालांकि, सात साल बाद एक बार फिर माफिया अजीत शाही की गुंडई सामने आई और बैंक के कर्मचारियों ने एक जुट होकर माफिया और उसके गुर्गे के खिलाफ तहरीर देकर केस दर्ज कराया है।
नर्सिंग होम से वसूली करता है सूरज
सूरज सिंह अपने साथियों संग मिलकर नर्सिंग होम से रंगदारी वसूलता है। न देने पर ही वारदात को अंजाम देता है। अभी एक साल पहले सूरज ने रंगदारी न देने पर डीआईजी बंगला के सामने स्थित एक नर्सिंग होम पर फायरिंग कर सनसनी फैला दी थी। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर सूरज और उसके साथियों को जेल भेजा गया था। जेल से जमानत पर छूटने के बाद आरोपी सूरज सिंह ने फिर से अपना पुराना काम शुरू कर दिया। शनिवार को तारामंडल के एक नर्सिंग होम में अपने तीन साथियों संग रंगदारी वसूलने गया था। डॉक्टर के मना करने पर आरोपियों ने तोड़फोड़ की थी। गिरफ्तारी न होने पर एसएसपी ने इनाम घोषित किया है।