पटना में नशीली दवाइयों के पकड़े जाने के बाद गोरखपुर में छानबीन कर रही नारकोटिक्स टीम
गोरखपुर से बिहार और नेपाल के बार्डर इलाके में बड़े पैमाने पर भेजी जाती हैं दवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नशीली दवाइयों के धंधेबाजों की तलाश में आई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स की टीम ने दूसरे दिन भी भालोटिया मार्केट में समय बिताया। चर्चा है कि टीम ने कुछ फर्माें पर जाकर दवाइयों की बिक्री के तरीकों को समझा। इसके बाद चार फर्माें से बिल-बाउचर और कंप्यूटर का हार्ड डिस्क कब्जे में लेकर टीम लखनऊ रवाना हो गई। एलआईयू की टीम ने भी मार्केट में जाकर धंधेबाजों में बारे में छानबीन की।
गोरखपुर में कफ सीरप से अधिक धंधेबाजी मानसिक रोग के इलाज में प्रयुक्त होने वाले कुछ टेबलेट को लेकर है। बताया जाता है कि इन टेबलेट का प्रयोग धंधेबाज नशे के अलावा शराब बनाने में भी कर रहे हैं। गोरखपुर के चार-पांच स्टाकिस्ट ऐसे हैं, जिनका माल बिहार और नेपाल बार्डर के इलाके में जाता है। पटना में नारकोटिक्स टीम ने एक दुकान के गोदाम से बड़ी मात्रा में नशीली दवाइयां बरामद की हैं।
चर्चा है कि जो दवाइयां पकड़ी गईं हैं, उनका बैच नंबर गोरखपुर की एक दुकान को आवंटित है। इसके बाद से ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स की लखनऊ टीम ने गोरखपुर में जांच पड़ताल शुरू की है। शुक्रवार को टीम ने तीन बड़े स्टाकिस्टों की दुकान में जानकार छानबीन की। शनिवार को भी एक दुकान में जांच की चर्चा है। सूत्रों ने बताया कि टीम ने जिन दुकानों पर जांच की थी, वहां से बिल-बाउचर और कंप्यूटर का हार्ड डिस्क भी कब्जे में लिया है।
दो पदाधिकारियों के दुकानों की हुई जांच
जिन चार दुकानों की जांच की गई है, उनमें से दो दुकानदार दवा विक्रेता समिति के पदाधिकारी भी हैं। शुक्रवार को इसकी जानकारी होने पर संगठन से जुड़े पदाधिकारी समर्थन में गए थे, लेकिन मामला नारकोटिक्स विभाग से जुड़ा होने के चलते पदाधिकारियों व अन्य व्यापारी धीरे-धीरे अपने दुकान में पहुंच गए। शनिवार को दिन भर बाजार का माहौल पूरी तरह सामान्य था। नारकोटिक्स के अलावा एलआईयू की टीम भी मार्केट में घूम रही थी, लेकिन व्यापारी किसी तरह की जांच की जानकारी से इंकार कर रहे थे। दोपहर एक बजे एक दुकान के आगे खड़े तीन एमआर व दो दुकानदार पहले की घटनाओं को लेकर चर्चा में मशगूल थे।
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पहले गीडा, फिर महराजगंज में पकड़ी गई थीं दवाएं
पूर्वांचल में नशीली दवाओं के धंधेबाजों की जड़ें काफी गहरी हैं। पिछले साल गीडा में एक व्यापारी के गोदाम में बड़ी मात्रा में कफ सिरप पकड़ी गई थी। कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद पूरा प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया। अब अफसर भी उस प्रकरण पर कोई बात नहीं करना चाहते हैं। इसी तरह पिछले साल महराजगंज में करीब 765 करोड़ की दवाइयां पकड़ी गई थीं। इसके बाद शासन ने यह गाइड लाइन जारी की कि ऐसी दवाएं जिनका प्रयोग नशे के लिए करने की आशंका है, उन पर निगरानी के लिए ड्रग इंस्पेक्टर कार्यालय में रजिस्टर बनाया जाएगा, जिसमें हर सप्ताह दवाइयों का विवरण दर्ज होगा, लेकिन यह सिस्टम भी धरातल पर नहीं उतरा। इसके चलते नशीली दवाएं धड़ल्ले में बिक रही हैं।