नेपाल में हुई बारिश के चलते सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को नदी खतरे के निशान 74.98 से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जबकि सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। ब्रह्मपुर इलाके के नेकवार-बोहाबार बंधे पर दुबौली ढाले के पास पुलिया से रिसाव होने लगा। प्रशासन ने मिट्टी की बोरियां लगाकर रिसाव को कुछ देर बाद बंद कर करवा दिया।
नेपाल में हुई बारिश के चलते सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को नदी खतरे के निशान 74.98 से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जबकि सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।
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ब्रह्मपुर इलाके के नेकवार-बोहाबार बंधे पर दुबौली ढाले के पास पुलिया से रिसाव होने लगा। प्रशासन ने मिट्टी की बोरियां लगाकर रिसाव को कुछ देर बाद बंद कर करवा दिया। शनिवार को चार और गांव बाढ़ के पानी से घिर गए। बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या अब 28 हो गई है।
महेवा के पास बाढ़ के पानी में थर्मोकोल के सहारे आता नाटे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को राप्ती नदी के जलस्तर में 21 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। सरयू नदी का जलस्तर कम हुआ है, फिर भी तुर्तीपार में नदी खतरे के निशान 64.01 मीटर से 36 सेमी ऊपर 64.37 मीटर पर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से फसलें डूब रही हैं। डीएम कृष्णा करुणेश व एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बड़हलगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
राजघाट बैकुण्ठ धाम तक आया बाढ़ का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
ब्रह्मपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के नेकवार-बोहाबार बंधे पर स्थित गोर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से दुबौली ढाले के पास पुलिया से शनिवार देर शाम को रिसाव होने लगा। विभाग ने बोरी में मिट्टी भर कर रिसाव को बंद कराया।
बड़हलगंज व चिल्लूपार प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घिरे गांव लखनौरी व पटना पुलिस चौकी के पास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डेरवा के चिकित्सकों की टीम ने शिविर आयोजित कर 153 मरीजों को निशुल्क दवा वितरित किया।
बाढ़ क्षेत्र का जायजा लेने आए डीएम कृष्णा करुणेश व एसएसपी गौरव ग्रोवर ने चिकित्सकों से बाढ़ के चलते होने वाली बीमारी व ग्रामीणों को दी जा रही दवा आदि की विस्तृत जानकारी ली। पटना चौराहे के पास बाढ़ पीड़ितों से डीएम ने बाढ़ का हाल जाना व समस्याएं पूछा। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ के पानी में सुरक्षित यात्रा करने का निर्देश दिया।
राप्ती नदी पर रामघाट पर बाढ़ का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
विधायक राजेश त्रिपाठी ने शनिवार की शाम एसडीएम और बाढ़ खंड दो सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ कछारांचल के राप्ती नदी पर बने मझवलिया-नवलपुर तटबंध का निरीक्षण किया। सेमरा में नदी की धारा मोड़ने के लिए हुए कार्य पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से मिलकर टेक्निकल कमेटी से जांच कराने की बात कही। राप्ती व सरयू नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी के कारण 15 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई गांव व टोले के लोग तो सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
कैंपियरगंज प्रतिनिधि के अनुसार रघुनाथपुर व बुढ़ेली का टोला कोमर बाढ़ के पानी से घिर गया है। राप्ती व रोहिन नदी के जलस्तर में वृद्धि से नदी और तटबंध के बीच स्थित रघुनाथपुर टोला व बुढेली का टोला कोमर बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। उपजिलाधिकारी कैंपियरगंज रोहित कुमार मौर्य ने जलस्तर वृद्धि की निगरानी की जा रही है।
पिपरौली प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में आमी नदी के बाढ़ का पानी तेजी के साथ बढ़ रहा है। गांवों के किनारों तक पानी आने से सब्जी की फसल डूब कर चौपट हो गई है। पिपरौली के बाढ़ ग्रस्त बेलवाडाडी, बनौडा, रखौना, कटका, गाडर, कैली, कोल्हुई आदि गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है।
राप्ती नदी पर गुरु गोरक्षनाथ घाट बाढ़ का पानी
- फोटो : अमर उजाला
पाली प्रतिनिधि के अनुसार मटियारी गांव के कुसम्हा टोला, रिठना, अमसार में राप्ती नदी का पानी पहुंच गया है। वहीं आमी का पानी बढ़ने से ग्राम मंझरिया तक पानी पहुंच गया है। रिठना गांव में आने जाने के लिए लोगो को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
गोला प्रतिनिधि के अनुसार बिसरा गांव में सरयू नदी के तट पर स्थित मल्लाह टोले में पत्थरों से बैरिकेडिंग की जा रही है। नगर पंचायत के द्वारा सरयू नदी के कुकुरहा घाट पर एक बैनर लगाकर चेतावनी दी गई कि स्थानीय लोग इस घाट पर स्नान न करें।
गीडा/पिपपरौली प्रतिनिधि के अनुसार ब्लाक के दक्षिणी छोर पर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरलही में आमी और राप्ती के बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे विद्यालय के बरामदे और कमरों में पानी पहुंच गया है।
जंगल कौड़िया प्रतिनिधि के अनुसार रोहिन नदी से महेसरा ताल का जुड़ाव है जिसके चलते नदी के जलस्तर के साथ ही महेसरा ताल का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है और इसके आसपास रहने वाले ग्रामीणों को बाढ़ का डर सताने लगा है। ताल में बना प्राचीन विष्णु मंदिर के चारों तरफ से पानी से घिर गया है।