रेलवे कोऑपरेटिव बैंक में धमकी देने और रंगदारी मांगने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मामले में बैंक कर्मचारियों ने एडीजी को शिकायती पत्र देकर दो आरोपियों अनिल सिंह विशेन, कौशल कुमार शाही उर्फ बमभोले शाही पर सुलह करने और केस वापस लेने का दबाव बनाकर धमकी देने का आरोप लगाया है। दोनों आरोपी बैंक के कर्मचारी हैं। एडीजी ने पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है।
बैंक कर्मचारियों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में लिखा गया है कि 12 मई को रेलवे कोऑपरेटिव बैंक में घुसकर माफिया अजीत शाही, अनिल सिंह विशेन, कौशल कुमार शाही आदि ने रंगदारी मांगते हुए धमकाया था। घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज करते हुए माफिया अजीत शाही को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य लोगों ने कोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर लिया है।
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बताया जा रहा है कि कौशल शाही के बुलाने पर ही अजीत शाही लाव लश्कर के साथ बैंक पहुंचे थे। आरोप है कि अनिल सिंह विशेन और कौशल शाही जमानत पाने के बाद अलग-अलग तरीके से कर्मचारियों को धमका रहे हैं। कर्मचारियों पर केस को वापस लेने का दबाव बनाने हुए अंजाम भुगतने की धमकी दी जा रही है। यह भी आरोप है कि कौशल कुमार शाही बैंक में कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन बैंक का कोई भी काम नहीं करते और न ही कभी कार्यालय आकर हस्ताक्षर करते हैं। पूरी घटना के सूत्रधार भी बताए जाते हैं।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि कौशल शाही पूर्व में ड्यूटी पर न आकर वेतन भी लेते रहे हैं। प्रार्थना पत्र देने वालों में प्रमुख रूप से संजय सिंह, राजेश सिंह, इंद्रजीत बहादुर चंद, राजेश कुशवाहा, मनोज कुमार शाही, जितेंद्र पटेल, उग्रसेन मिश्रा, दिनेश, देवेंद्र प्रताप सिंह, दिलीप कुमार आदि शामिल थे। एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि मामला गंभीर है, जांच कर पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।