बिहार के बिल के आधार पर दाल तस्करी का मामला
बैंकों की जांच हो तो यहां भी पकड़े जा सकते हैं तस्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। मध्य प्रदेश के कटनी में दाल की बड़ी कंपनी पर बृहस्पतिवार को आयकर विभाग के छापे के बाद गोरखपुर एवं आसपास के दाल के धंधेबाजों में हड़कंप मच गया है। बिहार के बिल पर दाल तस्करी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा मध्यप्रदेश और दिल्ली सहित अन्य शहरों तक भी फैला है। छापे में वहां बड़ी कर चोरी पकड़ में आने की संभावना है।
कटनी में दाल के कारोबारी के वहां छापा की चर्चा शुक्रवार को महेवा और साहबगंज गल्ला मंडी में होती रही। व्यापारियों ने ये बातें भी कहीं कटनी से गोरखपुर व आसपास के किन-किन व्यापारियों के वहां ज्यादा दाल आती रही है। व्यापारियों के अनुसार बिहार में मंडी नहीं है, इस कारण में बिहार में खाद्य पदार्थ भेजने या वहां से मंगाने पर डेढ़ प्रतिशत मंडी शुल्क बच जाता है। एक ट्रक में 30 टन दाल लादी जाती है और इस पर करीब 67 हजार रुपये मंडी शुल्क जमा होता है।
व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश, दिल्ली व अन्य शहरों से जो खाद्य पदार्थ आता है, वह बिहार के किसी शहर के फर्म के नाम आता है, लेकिन उसे मांग के अनुसार गोरखपुर, बस्ती, देवरिया सहित अन्य शहरों में उतार लिया जाता है। फिलहाल जहां दाल उतारी जाती है, वहीं के व्यापारी स्थानीय बैंक खाते में दाल की रकम जमा करते हैं, जबकि नियम के अनुसार बिहार के लिए माल बुक हुआ है तो दाल बिक्री की रकम भी बिहार में जमा होनी चाहिए। साहबगंज मंडी के एक व्यापारी ने बताया कि एक ट्रक दाल में 67 हजार रुपये मंडी शुल्क की चोरी होती है इसलिए धंधेबाज अब होशियारी कर रहे हैं। बिहार से दाल का बिल और खाली ट्रक भेज देते हैं। खाली ट्रक टोल टैक्स जमा करते हुए जाता है और जीपीएस सिस्टम के अनुसार भी बिहार से वाहन आता है। उसी ट्रक में गोरखपुर या आसपास दाल लाद दी जाती है।
इस खेल में शुल्क जमा नहीं होता है और अधिकारियों की लापरवाही के कारण खेल भी पकड़ में नहीं आता है। दाल का खेल बहुत बड़ा है, क्योंकि गोरखपुर में ही एक दिन के दाल का करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार है।
कोट
दाल के वाहनों की नियमित जांच कराई जा रही है। बिहार से आने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी कर रहा हो तो जरूर पकड़ में आ जाए। बिहार के बिल के मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
- प्रशांत वर्मा, एसडीएम, चौरीचौरा
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