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Gorakhpur News: माननीयों का फोन रिसीव नहीं करते अफसर

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गोरखपुर। पुलिस-प्रशासन सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना जरूरी होगा। यदि किसी वजह से संबंधित लोग फोन नहीं रिसीव कर सकते हैं तो कालबैक कर जरूर बात करेंगे। इसके बावजूद माननीयों का फोन अफसर नहीं रिसीव करते हैं। गत दिनों विधानमंडल में मामला उठने के बाद शासन की ओर से कमिश्नर, डीएम और एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों को शासन से आठवां नोटिस जारी हुआ है। संसद सदस्य एवं राज्य विधान मंडल के सदस्यों के प्रति शिष्टाचार/अनुमन्य प्रोटोकाल के अनुपालन के लिए यह निर्देश जारी हुआ है।
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जानकारी के मुताबिक, लखनऊ में चल रहे विधान मंडल के द्वितीय सत्र 2023 के दौरान यह मामला उठाया गया। सदन को बताया कि सदस्यों के प्रति प्रोटोकाल के अनुपालन के संबंध कई शासनादेश निर्गत हुए हैं। इसके बाद भी संसद सदस्यों और राज्य विधान मंडल के सदस्यों (विधायक/ विधान परिषद सदस्य) के प्रति शासनादेशों का पालन नहीं हो रहा है। इससे शासन की छवि धूमिल हो रही है।
मंडलीय और जनपदीय अधिकारी और उनके अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी अपने मोबाइल फोन में सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य के नंबर तक सेव नहीं रखते हैं। इससे गंभीर बात यह है कि किसी कारण से फोन रिसीव नहीं करने पर काल बैक भी नहीं करते हैं। इससे जनप्रतिनिधियों को असुविधा होती है।
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अधिकारी ही नहीं, कर्मचारी भी सेव करेंगे मोबाइल फोन नंबर
शासन की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि मंडल और जनपद के अधिकारी सभी जनप्रतिनिधियों के सीयूजी नंबर और उनके मोबाइल फोन नंबर को अनिवार्य रूप से अपने मोबाइल फोन में सेव संरक्षित करें। किसी महत्वपूर्ण बैठक अथवा न्यायालय के समक्ष होने की दशा में फोन आने पर रिसीव न कर पाएं तो मैसेज दें। साथ ही, जल्द से जल्द काल बैक करने कर बात करें। जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन नंबर सेव करने की सूचना अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी अपने प्रभारी अधिकारी और डीएम को देंगे। डीएम इसकी सूचना कमिश्नर के माध्यम से अपर मुख्य सचिव प्रमुख सचिव व सचिव को देंगे। इसके अलावा कार्यालय के सूचना पट्टों पर भी जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन नंबर लगाए जाएंगे।
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पहले भी जारी हो चुका है शासनादेश
जानकारों के मुताबिक, कुछ अधिकारी और कर्मचारी जानबूझकर जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन रिसीव नहीं करते हैं। खासकर, विपक्ष के सांसदों और विधायकों को अहमियत नहीं देते हैं। इस संंबंध में पहले भी शासन के संसदीय शिष्टाचार/पत्राचार कार्यान्वयन अनुभाग की ओर से सात बार पत्र जारी किया जा चुका है।
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