दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार को नए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) बिल के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र सुबह से ही विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने खून से लिखा हुआ एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम एडीएम सिटी व एसडीएम को सौंपा। इस बीच छात्रों ने विवि गेट के सामने मुख्य सड़क पर जाम लगाने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान पुलिस से नोकझोंक भी हुई। इसके बावजूद करीब 15 से 20 मिनट तक मुख्य सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन को देखते हुए कैंट थाना और अन्य थानों की पुलिस फोर्स गेट पर मौजूद रही। विवि गेट पर प्रदर्शनकारियों ने “शिक्षा बचाओ”, “स्वायत्तता बनाए रखो” और “छात्र विरोधी नीति वापस लो” जैसे नारे लगाए। छात्र नेताओं का कहना है कि नए यूजीसी बिल के प्रावधान विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और शैक्षणिक निर्णयों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ा सकते हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता ही उनकी गुणवत्ता की पहचान है। छात्रों का यह भी कहना है कि बिल के तहत जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने और सवर्ण समाज के साथ दोहरी नीति अपनाने का जोखिम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह बिल वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में सत्यम गोस्वामी, नारायण दत्त पाठक, प्रतीक तिवारी, अश्विनी द्विवेदी, सक्षम पांडेय, ओम पंडित, जतिन मिश्रा, अंकित मिश्रा, नीरज मिश्रा, आदर्श द्विवेदी, आदर्श शुक्ला, उज्ज्वल सिंह, सत्यम शुक्ला, हिमांशु सिंह, देवव्रत राय, रुद्र त्रिपाठी, रवि पांडेय, सत्यम सिंह, आनंद सिंह सहित कई छात्र मौजूद रहे। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा न देकर सभी को एक समान कानून लागू करना चाहिए। लेकिन यूजीसी के इस कानून के तहत छात्रों के बीच जाति को बढ़ावा देना तथा सवर्ण समाज के साथ दोहरी नीति अपनाना गलत है।