मामले की जानकारी होने पर एसीएमओ डॉ. गणेश यादव देर शाम जांच के लिए सीएचसी पहुंचे। उन्होंने चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों से अलग-अलग जानकारी ली। उन्होंने परिजनों से भी बात की। ज्योति के ससुर और पति नितेश ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और कर्मचारी की लापरवाही से ज्योति की जान गई। आरोप है कि सुबह हालत बिगड़ने पर मुंह से झाग और नाक से खून निकलने लगा था। इसके बाद मरीज को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
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आशा कार्यकर्ता सुशीला का आरोप है कि उसी समय मरीज की मौत हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
सीएचसी पर तैनात महिला डॉ विजयलक्ष्मी घोष ने कहा कि रात में उनकी ड्यूटी नहीं थी। वह सुबह आठ बजे पहुंचीं तो मरीज को झटका आ रहा था। मुंह से झाग निकल रहा था। इसके बाद मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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सीएचसी प्रभारी डॉ कृष्ण मोहन अग्रवाल ने कहा कि रात में महिला को लाया गया था। उस समय उनकी हालत गंभीर थी। हमें सुबह जानकारी हुई। उस समय बच्चे की धड़कन चल रही थी। उसे डॉ. विजयलक्ष्मी ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पूरी जानकारी लेकर ही इस बारे में कुछ बता पाऊंगा।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि परिजनों के आरोप के आधार पर मामले की जांच के लिए एसीएमओ को भेजा गया था। हालत गंभीर होने पर ही मरीज को रेफर किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।