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Uttarkashi Tunnel Rescue: सुरंग में दम घुटा मगर गोरक्षनगरी के प्रवीण ने नहीं हारी हिम्मत, सीएम योगी ने दी बधाई

Thu, 30 Nov 2023 02:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो वंदना त्रिपाठी, गोरखपुर।

सार

सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को 17 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकालने वाली रेस्क्यू टीम की अगुवाई करने वाले प्रवीण यादव गोरखपुर के निवासी हैं। उनके मुताबिक, इस अभियान के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए। कई बार उम्मीदें पस्त होती दिखीं, लेकिन जान बचाने का हौसला रखने वालों ने उम्मीदें नहीं छोड़ी।
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बाएं प्रवीण यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 उत्तरकाशी स्थित सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालने का रेस्क्यू मेरे जीवन का सबसे कठिन व खतरनाक पल था। ऑपरेशन के दौरान हमें हर दिन एक-दो घंटे ही आराम मिलता था। 45 मीटर से अधिक दूरी तक पाइप में रेंगते हुए पहुंचे। एक समय ऐसा भी आया कि अंदर दम घुटने से हमारी सांसें फूलने लगीं। लगा कि दम निकल जाएगा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मजदूर बाहर सुरक्षित निकले तो सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। यकीन मानिए, लोगों का जीवन बचाने वाले दल में होने की खुशी ऐसी थी कि बयां नहीं कर सकता।

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सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को 17 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकालने वाली रेस्क्यू टीम की अगुवाई करने वाले प्रवीण यादव गोरखपुर के निवासी हैं। उनके मुताबिक, इस अभियान के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए। कई बार उम्मीदें पस्त होती दिखीं, लेकिन जान बचाने का हौसला रखने वालों ने उम्मीदें नहीं छोड़ीं। सभी के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद प्रवीण और उनकी टीम को चारों तरफ से बधाई मिल रही है। उनके घर व ससुराल पहुंचकर भी लोग बधाई दे रहे हैं।



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प्रवीण यादव ट्रेंचलेस इंजीनियरिंग के भूमिगत सुरंग विशेषज्ञ हैं। वह गोरखपुर के रघुवाडीह गांव के रहने वाले हैं, जबकि उनकी ससुराल मोहद्दीपुर के बिछिया में है। फोन पर बातचीत में प्रवीण ने बताया-हादसे के वक्त दिल्ली में घर पर था। मुझे और मेरी टीम को तत्काल बुलाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में जब ऑगर ड्रिल मशीन के रास्ते में एक धातु का गार्डर आया, तब मैं 45 मीटर से अधिक दूरी तक पाइप में रेंगते हुए पहुंचा। मशीन को फिर से चालू करने के लिए तीन घंटे से कठिन परिश्रम के बाद गैस कटर की मदद से पाइप को काटा गया।

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उन्होंने बताया कि जब सारे प्रयास विफल हो गए तब उन्होंने अपने साथी जितेंद्र सिंह और बलिंदर यादव के साथ अंदर जाने की योजना बनाई। इसकी अनुमति मिलने के बाद हमने गैस कटर और पानी की दो बोतलें लीं। जगह कम होने की वजह से रेंगते हुए अंदर गए। फिर 40 मीटर के बाद मशीन से कटाई शुरू की। मशीन की हीट से रही-सही ऑक्सीजन भी खत्म हो गई। हमारी सांसें फूलने लगीं, लेकिन हमने हार नहीं मानी। 15 वर्षों से यह काम कर रहा हूं, जिसके अनुभव का लाभ मिला।

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उन्होंने बताया-इस ऑपरेशन के दौरान हमें हर दिन एक-दो घंटे ही आराम मिलता था। लेकिन, जान बचाना पहले जरूरी था। हम जहां रहते थे वहीं कुछ देर आराम करके आगे बढ़ जाते थे। इन दिनों परिवार से भी ठीक से बातचीत नहीं हो मुझे पता था कि अंदर फंसे लोग मेरे जैसे ही हैं। मैं खुद भूमिगत सुरंगों में काम करता हूं और किसी दिन यह मेरे साथ भी हो सकता है। फिर कोई और मेरी मदद करेगा, जैसे आज मैंने किया। यही बात प्रेरणा देती रही और भगवान पर भरोसा कर हम आगे बढ़ते गए और सफल हुए।

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सीएम योगी ने दी बधाई
प्रवीण ने कहा कि सुरंग से निकलने के बाद मजदूरों के चेहरे पर खुशी देखकर खुश हूं। बाहर आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह के साथ मजदूरों ने हमें धन्यवाद दिया। उनका परिवार भी हमें दुआएं दे रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने उनसे बात की और बधाई के साथ हमारे काम को सराहा तो सारी थकान मिट गई।
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