उन्होंने बताया कि जब सारे प्रयास विफल हो गए तब उन्होंने अपने साथी जितेंद्र सिंह और बलिंदर यादव के साथ अंदर जाने की योजना बनाई। इसकी अनुमति मिलने के बाद हमने गैस कटर और पानी की दो बोतलें लीं। जगह कम होने की वजह से रेंगते हुए अंदर गए। फिर 40 मीटर के बाद मशीन से कटाई शुरू की। मशीन की हीट से रही-सही ऑक्सीजन भी खत्म हो गई। हमारी सांसें फूलने लगीं, लेकिन हमने हार नहीं मानी। 15 वर्षों से यह काम कर रहा हूं, जिसके अनुभव का लाभ मिला।
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उन्होंने बताया-इस ऑपरेशन के दौरान हमें हर दिन एक-दो घंटे ही आराम मिलता था। लेकिन, जान बचाना पहले जरूरी था। हम जहां रहते थे वहीं कुछ देर आराम करके आगे बढ़ जाते थे। इन दिनों परिवार से भी ठीक से बातचीत नहीं हो मुझे पता था कि अंदर फंसे लोग मेरे जैसे ही हैं। मैं खुद भूमिगत सुरंगों में काम करता हूं और किसी दिन यह मेरे साथ भी हो सकता है। फिर कोई और मेरी मदद करेगा, जैसे आज मैंने किया। यही बात प्रेरणा देती रही और भगवान पर भरोसा कर हम आगे बढ़ते गए और सफल हुए।
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सीएम योगी ने दी बधाई
प्रवीण ने कहा कि सुरंग से निकलने के बाद मजदूरों के चेहरे पर खुशी देखकर खुश हूं। बाहर आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह के साथ मजदूरों ने हमें धन्यवाद दिया। उनका परिवार भी हमें दुआएं दे रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने उनसे बात की और बधाई के साथ हमारे काम को सराहा तो सारी थकान मिट गई।