जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होने से एक दिन पहले प्रदेश सरकार ने उन्हें प्रशासक नियुक्त कर दिया है। यह व्यवस्था नई पंचायतों के चुनाव व गठन तक जारी रहेगी। इस व्यवस्था पर सदस्यों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि उन लोगों को क्षेत्र की जनता ने चुना और उन लोगों ने अध्यक्ष को। ऐसे में अध्यक्ष के साथ समिति भी बहाल होनी चाहिए।
जानकारी के मुताबिक, नई जिला पंचायतों के गठन होने तक प्रशासकों के पास विकास कार्यों और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी होगी। हालांकि ग्राम प्रधानों को भी प्रशासक बनाया गया है, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। प्रधान जनता की ओर से चुन कर आते हैं, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष को सदस्य चुनते हैं।
अब जिला पंचायत सदस्यों ने सरकार के इस निर्णय पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अध्यक्ष भी उन लोगों की तरह ही सदस्य चुनी गई थीं। सदस्यों ने उन्हें अध्यक्ष बनाया है। इसलिए सरकार सदस्यों को भी वह अधिकार दे, जो अध्यक्ष को मिला है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह जनता के साथ विश्वासघात होगा।
सरकार सदस्यों के साथ न करे नाइंसाफी : सुधा
प्रदेश सरकार की ओर से जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने पर जिला पंचायत सदस्य सुधा सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सदस्यों के साथ नाइंसाफी न करे। वह लोग 50 हजार मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि अध्यक्ष को प्रशासक बनाकर उनका अधिकार बहाल किया है तो सदस्यों का भी अधिकार बहाल होना चाहिए। जनता हमसे सवाल पूछेगी तो क्या जवाब देंगे।
अध्यक्ष के साथ सदस्यों का अधिकार हो बहाल : मायाशंकर
जिला पंचायत सदस्य मायाशंकर शुक्ल ने कहा कि सरकार का यह कदम सराहनीय है कि जब तक चुनाव नहीं हो रहा है तब तक अध्यक्ष प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे लेकिन सरकार इसके साथ ही सदस्यों को भी बहाल करे। सदस्यों ने ही अध्यक्ष का चुनाव किया है। अध्यक्ष पहले सदस्य हैं फिर अध्यक्ष। यदि सदस्यों का पावर बहाल नहीं हुआ तो जनता में गलत संदेश जाएगा। जनता की नाराजगी सरकार के प्रति बढ़ सकती है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने जो निर्णय लिया है उनकी नजर में वह ठीक है। व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार का यह निर्णय स्वागत योग्य है। ग्राम प्रधानों की तरह जिला पंचायत अध्यक्षों का मामला भी न्यायालय पहुंचेगा। न्यायालय की नजर में जो विधि संगत होगा उस फैसले को लागू किया जाएगा:
प्रशांत त्रिपाठी, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट