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अमर उजाला इंपैक्ट: पुलिस ने बसें हटवाईं, अभिभावकों ने कारें दूर खड़ी कीं, फिर भी खतरे बरकरार

Fri, 14 Apr 2023 03:31 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

ज्यादातर अभिभावक यातायात पुलिस के मना करने के बाद अपने वाहनों को पुराने आरटीओ कार्यालय और यूनिवर्सिटी चौराहे रोड पर पार्क कर अपने बच्चों को लेने स्कूल जाते हुए नजर आए। हालांकि, स्कूल प्रबंधनों की तरफ से जाम की समस्या से निजात और बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नजर नहीं आए।
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कार्मेल स्कूल रोड पर खड़ी रोडवेज की बसों और निजी वाहनों को हटवाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सिविल लाइंस क्षेत्र में स्कूलों के छूटने के बाद लगने वाले जाम को लेकर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बृहस्पतिवार को बच्चों के साथ ही आम लोगों को जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए यातायात पुलिस के जवान सड़कों पर उतरे। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से जाम से निजात को लेकर कोई पहल नहीं की गई।

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यातायात पुलिस की टीम दोपहर 12 बजे से करीब सिविल लाइंस के कार्मल स्कूल रोड पर पहुंची। इस दौरान यातायात पुलिस के साथ ही पुलिस के जवानों ने पुलिस लाइंस से लेकर बस स्टेशन के बीच सड़क पर खड़ी रोडवेज बसों को हटवाया। साथ ही पुलिस ने बस चालाकों को दोबारा बस खड़ी न करने की हिदायत देते हुए ऐसा करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। वहीं बच्चों को ढोने के लिए खड़े ऑटो और ई-रिक्शा को भी वहां से हटवाकर स्कूलों से दूर भेजा गया। लगभग एक घंटे की कार्रवाई के दौरान सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, खासतौर पर अवैध रूप से चल रहे ऑटो और ई-रिक्शा चालक कार्रवाई से बचने के लिए पुलिस और यातायात पुलिस के जवानों को देख भागते नजर आए।

आरटीओ चौराहे से सिटी मॉल तक की सड़क पर स्कूलों से छूटने के बाद लगने वाले जाम से राहत के लिए यातायात पुलिस के जवान मुस्तैद नजर आए। दोपहर एक बजे से ढाई बजे के बीच जो भी चार पहिया वाहन चालक इस सड़क पर जाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें चौराहे पर तैनात यातायात पुलिस के जवान रोक रहे थे, हालांकि कई कार चालक कार लेकर जबरन इस रोड की तरफ चले जा रहे थे। इससे जाम की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, ज्यादातर अभिभावक यातायात पुलिस के मना करने के बाद अपने वाहनों को पुराने आरटीओ कार्यालय और यूनिवर्सिटी चौराहे रोड पर पार्क कर अपने बच्चों को लेने स्कूल जाते हुए नजर आए। हालांकि, स्कूल प्रबंधनों की तरफ से जाम की समस्या से निजात और बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नजर नहीं आए।
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अध्यक्ष ने की अपील, सभी स्वर्णकार लगवाएं अग्निशमन यंत्र

हिंदी बाजार के डीडी मार्केट में गैस सिलिंडर में गन लगाकर सोने को तराशते कारीगर। (File) - फोटो : अमर उजाला।
स्वर्णकार कारीगर कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष ने सभी कारीगरों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी दुकानों में अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से लगवाएं। दुकान की क्षमता के अनुसार छोटा या बड़ा कोई भी यंत्र हो, उसे दुकान पर जरूर रखें। आभूषणों की कारीगरी और नक्काशी के साथ खुद और ग्राहकों की जान-माल की सुरक्षा करनी भी बाजार की जिम्मेदारी है। इसके अलावा अध्यक्ष की तरफ से अग्निशमन विभाग से भी संपर्क किया गया।

अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में ''रिफायनरी और नक्काशी से खतरे में पूरा बाजार'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि कैसे सराफा बाजार के कारीगर और रिफायनरी सेंटर वाले अपने लाभ के लिए ग्राहकों की जान खतरे में डाल रहे हैं। संकरी गली के कटरे और दुकानों में सिलिंडर के सहारे पाइप गन का प्रयोग कर काम किया जा रहा है। अगर दुर्भाग्यवश आग लगने की कोई घटना हो गई तो बाजार में कितना नुकसान हो सकता है।

खबर का संज्ञान लेते हुए स्वर्णकार कारीगर कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष ने व्यवसाय से जुड़े लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप पर सुबह ही अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग भेजकर कारीगरों को निर्देशित किया कि वे अग्निशमन यंत्रों के प्रति गंभीर हो जाएं। लिखा कि आप सभी अपनी दुकानों पर यंत्र लगवा लें। जिससे अगर जांच हो और अधिकारी आएं तो कारीगरों को गलत न पाएं। हालांकि, इस मैसेज से उन्होंने अपने लोगों को कार्रवाई से बचाने की अपील की थी। लेकिन, दूसरे सदस्यों उनसे सहमति जताई।

 अग्निशमन विभाग देगा प्रशिक्षण
खबर का संज्ञान लेकर मुख्य अग्निशमन अधिकारी से भी कारीगर संघ के पदाधिकारियों ने संपर्क किया। अनुरोध किया कि प्रशिक्षण कैंप लगाकर सभी कारीगरों को आग से बचाव के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके सिंह ने बताया कि बाजार घना है। सभी दुकानदारों को नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में आग लगने की घटनाओं के कारण बृहस्पतिवार को टीम नहीं जा पाई। लेकिन, अगले एक से दो दिन में कैंप लगाकर सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा और दिन दुकानों पर यंत्र नहीं लगे हैं, वहां लगवाए जाएंगे।
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रेलवे कैब-वे पार्किंग में मिलने लगी जीएसटी की रसीद, जांच अब भी जारी

रेलवे कैब वे की पार्किंग पर लगाई गई नई रेट लिस्ट की पर्ची । - फोटो : अमर उजाला।
रेलवे कैब-वे के पार्किंग स्टैंड पर अब वाहन चालकों को जीएसटी वाली पर्ची मिलनी शुरू हो गई है। जिस पर पार्किंग के लिए लगने वाले शुल्क के साथ ही जीएसटी की भी पूरी जानकारी है। इस सूचना के साथ पार्किंग स्थल पर नया बोर्ड भी लग गया है। वहीं, जीएसटी विभाग यह जांच कर रहा है कि उपभोक्ताओं से वसूला जाने वाला कर जमा भी किया गया है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद कर निर्धारण कर जीएसटी विभाग गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई करेगा।

अमर उजाला ने दो अप्रैल के अंक में ''पब्लिक परेशान, वसूली पूरी तो पर्ची पर जीएसटी नंबर क्यों नहीं'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसका उद्देश्य था कि आम लोगों से स्टैंड वालों के शुल्क लेने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा सके। खबर में शहर के चार प्रमुख स्टैंडों नगर निगर की गोलघर पार्किंग, धर्मशाला में पार्किंग, रेलवे स्टेशन की कैब-वे पार्किंग और रेलवे की सामान्य पार्किंग की पड़ताल की गई थी।

खबर प्रकाशित होने के बाद जीएसटी विभाग ने दो अधिकारियों की टीम गठित करते हुए उन्हें भौतिकी परीक्षण कर पूरी रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया। मामले में अब भी टीम की जांच चल ही रही है। लेकिन, इधर कैब-वे पार्किंग की तरफ से अब पुरानी व्यवस्था को खत्म करते हुए पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। पार्किंग के प्रवेश द्वार पर ही फर्म ने जीएसटी के साथ दरों की सूची एक बोर्ड पर लगा दी है। पार्किंग स्टैंड की पर्ची पर भी जीएसटी का उल्लेख है। एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड वन विमल कुमार राय ने बताया कि गंभीर मामला है। कितने कर की हेराफेरी हुई, इसकी जांच चल रही है। पूरी रिपोर्ट के बाद सभी पर कार्रवाई की जाएगी।
 
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