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Gorakhpur: पीएम मोदी ने RMRC के ड्रोन से दवा पहुंचाने की कोशिश को सराहा, टीम ने 26 मिनट में किया था कमाल

Sun, 29 Oct 2023 04:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

आरएमआरसी गोरखपुर ने अपने फिल्ड स्टेशन हिमाचल प्रदेश स्थित किलोंग में ड्रोन से खांसी की दवा और कई अन्य बीमारियों के इलाज में काम आने वाले टेबलेट जिला अस्पताल से 18 किमी दूर स्थिति पीएचसी थोलांग पर ड्रोन के जरिए भेजी थी। दूसरी तरफ से मरीजों के ब्लड व स्प्यूटम सैंपल को वापस जिला अस्पताल मंगाया था। इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ 26 मिनट का वक्त लगा था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमालय की ऊंची और दुर्गम चोटियों के बीच रह रहे लोगों के बीच ड्रोन के जरिए दवा पहुंचाने वाली रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) गोरखपुर की टीम के सफल प्रयोग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। प्रधानमंत्री ने शनिवार को देश के 37 शहरों में लगे राष्ट्रीय रोजगार मेले को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए शाबाशी दी और आरएमआसी गोरखपुर के वैज्ञानिकों की हौसला अफजाई की।

 

आरएमआरसी गोरखपुर ने अपने फिल्ड स्टेशन हिमाचल प्रदेश स्थित किलोंग में ड्रोन से खांसी की दवा और कई अन्य बीमारियों के इलाज में काम आने वाले टेबलेट जिला अस्पताल से 18 किमी दूर स्थिति पीएचसी थोलांग पर ड्रोन के जरिए भेजी थी। दूसरी तरफ से मरीजों के ब्लड व स्प्यूटम सैंपल को वापस जिला अस्पताल मंगाया था। इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ 26 मिनट का वक्त लगा था। किलोंग लगभग 12000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके लिए ड्रोन को 15 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ाया गया। वहां का तापमान भी माइनस 10 से 15 डिग्री सेल्सियस था।

 

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस प्रयोग का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले पारंपरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ करने के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन और रक्षा निर्यात जैसे नए क्षेत्रों को भी बढ़ावा दे रही है। ड्रोन प्रौद्योगिकी की मदद से किए फसल मूल्यांकन, पोषक तत्वों के छिड़काव, स्वामित्व योजना के तहत भूमि मानचित्रण का कार्य हो रहा है। ड्रोन के माध्यम से ही हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पिति क्षेत्र में दवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसमें समय 2 घंटे से घटकर 20-30 मिनट से भी कम हो गया। इससे आने वाले दिनों में चिकित्सा जगत को फायदा मिलेगा।

 

इस प्रोजेक्ट की अगुवाई करने वाले आरएमआरसी के वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में इस प्रोजेक्ट की सफलता की चर्चा से सभी वैज्ञानिक खुश हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपने ट्विटर हैंडल से हमारी टीम को बधाई दी है।

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