महायोजना 2031 में विनियमित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर राहत भरी है। विनियमितीकरण क्षेत्र के लोग गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में मानचित्र के लिए आवेदन कर सकेंगे। वह जीडीए में निर्धारित शुल्क जमा कर अपने मकान के मानचित्र के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन अभी जीडीए से मानचित्र स्वीकृति के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
जीडीए ने विनियमित क्षेत्र में भू-उपयोग निर्धारण के लिए समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट आने पर निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद मानचित्र स्वीकृत किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने मानचित्र आवेदन के लिए आदेश जारी कर दिया है।
शासन से सात मार्च 2024 में महायोजना 2031 लागू कर दिया गया। इसमें शहर के बड़े क्षेत्र करीब 2500 एकड़ क्षेत्रफल को विनियमित करने का अधिकार जीडीए बोर्ड को दिया गया। बोर्ड ने इसके लिए कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। इसमें एक सदस्य के रूप में शासन का भी एक प्रतिनिधि होना है, जिसके लिए शासन को पत्र भेजा गया।
महायोजना में विनियमित होने के तीन माह बाद भी इस क्षेत्र के लोगों को राहत नहीं मिली। वह मानचित्र के आवेदन के लिए जीडीए का चक्कर लगा रहे थे, लेकिन मानचित्र के लिए आवेदन नहीं हो पा रहा था। इस बीच जीडीए वीसी ने शासन स्तर पर वार्ता के बाद विनियमित क्षेत्र के लोगों को मानचित्र के लिए आवेदन करने का आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। समिति द्वारा भू उपयोग का निर्धारण तय करने के बाद मानक के अनुरूप जांच कर जो भी निर्धारित शुल्क होगा उसे जमा करने के बाद मानचित्र पास करने की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
विनियमित के अभाव में मानचित्र नहीं हो पा रहा था पास
शहर क्षेत्र में लगभग ढाई हजार एकड़ क्षेत्रफल ऐसा था जिसे विनियमित नहीं किया गया था। इन क्षेत्रों को लेकर जब भी कोई मानचित्र का आवेदन आता था तो ‘विनियमितीकरण की प्रत्याशा’ में नोट लगाकर उसे वापस कर दिया जाता था। इसी बीच ऐसे क्षेत्र में कई काॅलोनियां विकसित होती गईं। 2001 की महायोजना के अनुसार, बड़ा भू-भाग हरित क्षेत्र भी था। हरित क्षेत्र में भी काफी निर्माण हुए हैं। ऐसा क्षेत्र भी था जिसमें भू उपयोग आवासीय था, यहां भी मानचित्र नहीं पास हो पाता था। जैसे-तैसे लोगों ने यहां मकान बनवा लिए, लेकिन जीडीए की ओर से उनके निर्माण को अवैध बताते हुए नोटिस जारी कर दिया गया था।
जीडीए ने जारी किया था आठ हजार से अधिक नोटिस
जीडीए ने अवैध निर्माण पर इस क्षेत्र में आठ हजार से अधिक नोटिस जारी कर आगे की प्रक्रिया भी जारी कर दी थी, लेकिन यह क्षेत्र विनियमित होने पर सभी नोटिस वापस ले लिए गए। महायोजना के बाद इस एरिया में बसे करीब 25 कॉलोनियों से अवैध का दाग धुल गया। यहां बने आवासों को वैध होने के साथ नक्शा पास होने की अनुमति मिल गई।
विकास शुल्क से मिल सकती है राहत
महायोजना में विनियमित क्षेत्र पहले से विकसित है। इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, सीवर सिस्टम, बिजली आदि की सुविधा पहले से मिल रही है। ऐसे में मानचित्र पास करने के दौरान लगने वाले विभिन्न प्रकार के शुल्क में से विकास शुल्क देने से उन्हें राहत मिल सकती है। इसे लेकर गठित समिति विचार कर रही है।
इन कॉलोनियों के लोग मानचित्र के लिए कर सकेंगे आवेदन
रामजानकीनगर, शक्तिनगर, टैगोरनगर, आदित्यपुरम, महादेवपुरम, अजयनगर, जफर कॉलोनी, गायत्रीनगर, झरना टोला, नंदानगर, इंदिरानगर, राजीवनगर, साकेतनगर, शिवाजीनगर, शुभम कॉलोनी, पार्वतीनगर, सिद्धार्थनगर, सैनिक कुंज, सैनिक आदि कॉलोनी शामिल हैं। यहां के लोग अब मानचित्र के लिए आवेदन कर सकेंगे।
महायोजना में विनियमित क्षेत्र के लोग मानचित्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसे लेकर आदेश जारी कर दिया गया है। विनियमित क्षेत्र के निर्धारण के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद निर्धारित शुल्क जमा करने पर मानचित्र पास कर दिया जाएगा।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए