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Gorakhpur News: तापमान के उतार-चढ़ाव से लोग हो रहे बीमार, अस्पतालों में भीड़

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गोरखपुर। सूरज की तपिश और बार-बार बदलती हवाओं के रुख ने पूर्वांचल में कभी पहाड़ तो कभी रेगिस्तान सरीखे मौसम का एहसास कराना शुरू कर दिया है। इस बदलाव का असर सामान्य जन जीवन पर पड़ा है। अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। डायरिया से लेकर बुखार तक के मरीज इलाज करा रहे हैं। एलोपैथ और होम्योपैथ के अलावा आयुर्वेद और घरेलू उपचार भी किए जा रहे हैं।
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सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी मरीजों से भरी पड़ी थी। 64 वर्षीय विश्राम चौहान डॉक्टर के चैंबर में खड़े हांफ रहे थे। डॉक्टर ने कुर्सी पर बैठाकर मर्ज पूछा तो ने बताया कि पेट में भारीपन महसूस हो रहा है। भूख नहीं लग रही है और कमजोरी के चलते खड़ा होने में भी दिक्कत आ रही है। डॉक्टर ने घर में नमक, चीनी व पानी का घोल या ओआरएस का घोल पीने की सलाह दी। साथ में सलाद खाने की भी सलाह दी।
उनके पीछे खड़ी बृजवंती ने बताया कि तीन दिन से पूरे परिवार के लोग डायरिया से पीड़ित हैं। दवा से अब आराम तो है, लेकिन गैस और खट्टी डकारें आ रही हैं। इस तरह के मरीजों से अस्पताल भरे हुए हैं। जनरल फिजिशियन डॉ. गौरव पांडेय बताते हैं कि तेज धूप में पसीना अधिक निकलता है। इसलिए पानी अधिक पीना चाहिए। साथ ही खीरा, ककड़ी आदि का सलाद सेहत के लिए ठीक रहता है।
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चार घंटे में खराब होता है खाना
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि गर्मी में खाना चार घंटे में खराब होने लगता है। इसलिए इस मौसम में खाना गरम करके नहीं बल्कि ताजा पकाया हुआ ही खाएं। इसके अलावा तेल, मसाला, मिर्च आदि से भी परहेज करें। सड़क के किनारे बिकने वाले फल, जूस और फास्टफूड से सबसे अधिक सावधानी रखना चाहिए। क्योंकि इन खाद्य पदार्थों पर वैक्टीरिया आसानी से पहुंच जाते हैं। इनके जरिए ये आदमी के पेट में पहुंचकर 24 से 48 घंटे बाद उसे बीमार बना देते हैं।
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