पंजीकरण के लिए हुआ आवेदन अगर किसी कारण से निरस्त हो जाता है, तो आवेदक दोबारा भी ऑनलाइन आवेदन कर लेता है। इसलिए कई धंधेबाज ऐसा करते हैं कि अपने नर्सिंग होम, अस्पताल या पैथालॉजी आदि सेंटर का पंजीकरण नहीं होने पर जांच के दौरान दोबारा आवेदन करने की कहानी सुनाने लगते हैं। इससे जांच के वक्त आरोपी बच निकलते हैं। पीपीगंज में जांच के दौरान एक ऐसा ही अस्पताल सामने आया जिसके संचालक यह दलील देकर बच निकले।
ऐसे अस्पतालों में बाेर्ड पर डॉक्टर का नाम तो होता है, लेकिन वह डॉक्टर उस अस्पताल में नहीं होता। शुक्रवार की रात हुई छापेमारी में यह साबित भी हुआ। डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी ही इलाज का जिम्मा संभाले हुए थे।
इसके बाद शनिवार को शहर के जिन दो अस्पतालों को सील किया गया, उनमें से एक के साइन बोर्ड पर जिन डॉक्टरों का नाम लिखा था, उसमें से कोई नहीं मिला। उनकी जगह फार्मासिस्ट ही उपचार कर रहे थे। सोमवार को कैंपियरगंज में दो अल्ट्रासाउंड सेंटर सील किए गए। एक सेंटर पर जिस रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम लिखा था, उनकी जगह कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति जांच कर रहा था।
तीन साल में 37 अस्पताल सील
| वर्ष |
अस्पताल सील |
| 2022 |
13 अस्पताल |
| 2023 |
18 अस्पताल |
| 2024 |
छह अस्पताल |
सीएमओ आशुतोष दूबे ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को जब भी कहीं से शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाती है। इसके अलावा समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं। अब ऐसे जो भी मामले मिलेंगे तो अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अवैध अस्पतालों का संचालन रोकने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे।