कोर्ट ने सात साल और पांच साल की सजा व 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया
- 2007 में दर्ज कराया गया था फर्जी केस, प्रयोगशाला में डीवीडी के कूटरचित होने की पुष्टि हुई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कूटरचित डीवीडी के आधार पर सीएम योगी समेत कई जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल करने के लिए केस दर्ज कराने वाले परवेज परवाज को बुधवार को कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में सात साल व पांच साल की सजा सुनायी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। परवेज को दुष्कर्म के एक मामले में पहले ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
राजघाट के तुर्कमानपुर निवासी परवेज ने तत्कालीन सांसद व वर्तमान में सीएम योगी आदित्यनाथ, पूर्व विधायक व वर्तमान में राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला और तत्कालीन विधायक व वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों पर उत्तेजक भाषण देने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। सबूत के तौर पर उसने एक डीवीडी भी दी थी।
जब उस डीवीडी की फारेंसिक जांच हुई तो पता चला कि उसमें टैंपरिंग व एडिटिंग की गई है। कूटरचना की पुष्टि होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदर्श श्रीवास्तव ने बुधवार को परवेज को कूटरचित दस्तावेज देने पर सात साल की सजा व दस हजार का जुर्माना और बदनाम करने के मामले में पांच साल की सजा व दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अर्थदंड न देने पर परवेज को एक माह 15 दिन का कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा।