जंगल कौड़िया-जगदीशपुर, जंगल कौड़िया-सोनौली रिंगरोड और नया गोरखपुर में लागू होगा रेट, तय होगा तीन योजनाओं का भविष्य
अधिक मुआवजे की मांग को लेकर फंस रहा पेच, निपटारे के लिए किसान लगातार उठा रहे हैं मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। जिले में चल रही तीन योजनाओं पर मुआवजे की रकम को लेकर लगे ग्रहण के टलने की उम्मीद जगी है। जंगल कौड़िया सोनौली रिंग रोड के मामले का निस्तारण कराने के लिए रविवार को पीपीगंज में किसानों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच पंचायत होगी।
इस पंचायत में मुआवजे की रकम तय होने के बाद अन्य दो जगहों पर जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड और नया गोरखपुर बसाने की योजना भी परवान चढ़ सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के आधार पर मसला हल किया जाएगा। मध्यस्थता के जरिये तीनों प्रकरण हल हो जाएंगे।
जंगल कौड़िया-सोनौली हाईवे के गोलीगंज रिंग रोड का काम किसानों ने रोक दिया है। मुआवजा बढ़ाने सहित अन्य मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को किसान डीएम कार्यालय पहुंचे थे। सौ से अधिक किसानों ने डीएम से मिलकर कार्रवाई की बात कही।
इस पर डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा था कि रविवार को पीपीगंज के साहबगंज में किसानों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में बातचीत होगी।
समझौता की बातचीत होने के बाद मुआवजे की जो रकम तय होगी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इसलिए रविवार तक के लिए रिंग रोड से संबंधित काम रोक दिया गया है। यदि यहां पर किसानों की बात मान ली गई तो इसके आधार पर अन्य दो योजनाएं भी परवान चढ़ सकेंगी।
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जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड का मुआवजा बढ़ाने की मांग
शहर को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड बनाया जाएगा। इसके लिए भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसका काम किसानों ने रोक दिया है। इस रिंग रोड को बनाने के लिए मानीराम, ताल जहदा, रहमत नगर, बालापार, बैजनाथपुर, नारायणपुर, परसिया रसूलपुर, कोनी, मठिया सहित अन्य गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित होगी। मई में शिविर लगाकर जब एनएचएआई और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कर्मचारी पहुंचे, तो किसानों ने उनको लौटा दिया था। किसानों ने दो टूक कहा कि जब तक संतोषजनक मुआवजा नहीं मिलेगा, अपनी भूमि प्रशासन को कतई नहीं देंगे। इससे करीब 15 दिनों से मामला ठप पड़ा है।
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नया गोरखपुर परियोजना में जमीन देने को तैयार नहीं किसान
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से नया गोरखपुर परियोजना लाई गई है। इसके लिए भूमि लेने में जीडीए सफल नहीं हो पाया है। सर्किल रेट से मुआवजे की राशि लेने को किसान तैयार नहीं हो रहे हैं। वे बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मांग रहे हैं। यदि पीपीगंज में बातचीत के आधार पर मुआवजा की औसत दर हुई तो इससे नया गोरखपुर में आ रही अड़चन भी खत्म हो जाएगी।
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छह माह के बैनामे की दर से निकालेंगे औसत
मुआवजे की रकम का निस्तारण करने के लिए डीएम ने संबंधित क्षेत्र में छह माह के भीतर बैनामे का विवरण जुटाने काे कहा है। इसके आधार पर उस क्षेत्र की जमीनों का औसत निकाला जाएगा। फिर उसी आधार पर मुआवजे की रकम तय होगी। औसत दर के आधार पर किसानों को मनाने की कवायद चल रही है। ऐसे में यदि पीपीगंज का मामला सुलझा तो अन्य प्रकरण भी आसानी से निपट जाएंगे।
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पीपीगंज के किसानों से जो बातचीत हुई है उसके आधार पर पहले छह माह का औसत दर तय किया जाएगा। इसके बाद शहरी और ग्रामीण की दर से मुआवजा बढ़ाया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत अन्य दो मसले भी सुलझाए जाएंगे।
- सुशील कुमार गौंड, मुख्य राजस्व अधिकारी/विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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