एम्स में कालाजार बीमारी पर आयोजित हुई कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कालाजार बीमारी पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्वांचल के छह जिलों में कालाजार के प्रभाव पर चर्चा की गई। इसमें छह जिलों के मेडिकल काॅलेज और जिला अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए। आयोजन में एम्स के सामुदायिक चिकित्सा एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की अहम भूमिका रही।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने कार्यशाला का उद्घाटन करते कहा कि कालाजार गंभीर बीमारी है। इसको खत्म करने की तैयारी अंतिम चरण में हैं। केंद्र सरकार ने 2025 तक कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। विभागाध्यक्ष डॉ. हरी शंकर जोशी ने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर इसके जांच और इलाज के इंतजाम है। यह बीमारी पूर्वांचल में छह जिलों को प्रभावित करती है। इसमें देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर और बनारस शामिल हैं। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. प्रदीप खरया ने बताया कि यह बीमारी एक संक्रमित मक्खी के कारण फैलती है, जिसे सैंडफ्लाई कहते हैं। बीएचयू की मेडिसिन विभाग की प्रो. जया चक्रवर्ती ने कालाजार के लक्षणों की जानकारी दी। बताया कि संक्रमित व्यक्ति का इलाज सीएचसी और जिला अस्पताल पर हो सकता है। इस दौरान सीएमएस डॉ. मनोज सौरभ, डॉ. तेजस पटेल, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. पारुल सिंह, डॉ. अनिल कोपरकर, डॉ. सुरुचि, डॉ. रेणुका, डॉ. अरूप मोहंती, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. रूपम, डॉ. राज किशोर सिंह, डॉ. सिराजुद्दीन, डॉ. धनंजय, डॉ. स्वतंत्र आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने किया।