गोरखपुर के हड़हवा फाटक के अगल-बगल खाली पड़ी जमीनें खरीदकर पांच दशक पहले घर बनवाने वालों ने तब सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके इलाके में भी फोरलेन और टू लेन जैसी चौड़ी सड़क बनेगी। लेकिन अब जब यह साकार होने जा रहा है तो सड़क के किनारे घर बनवाने वालाें को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ेगी।
क्योंकि चौड़ीकरण के लिए गोरखनाथ मंदिर रोड से लेकर मेडिकल कॉलेज रोड के एचएन सिंह चौराहे तक करीब पांच किलोमीटर के बीच सड़क के दोनों तरफ के लगभग एक हजार मकान व दुकानों पर बुलडोजर चलाना होगा।
स्थानीय लोग इस सड़क चौड़ीकरण का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन इतना जरूर चाहते हैं कि उनका मकान उतना ही तोड़ा जाए, जिससे कि वजूद बचा रहे। इन सबके बीच मकान व जमीन की पैमाइश होने से इस इलाके में खलबली मची हुई है।
एचएन सिंह चौराहे से बशारतपुर के रास्ते हड़हवा फाटक होते हुए हुमायूंपुर चौराहे से मुड़कर गोरखनाथ मंदिर तक जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण होना है। इस मार्ग पर दिन-रात वाहनों की आवाजाही रहती है। हड़हवा फाटक पर ओवरब्रिज बनना है। इस सड़क व पुल निर्माण कार्य का सीएम शिलान्यास भी कर चुके हैं।
पहले पुल निर्माण के लिए जगह की तलाश हो रही है। मंगलवार दोपहर में हड़हवा फाटक से हुमायूंपुर के बीच जमीनों की पैमाइश हो रही थी। बताया गया कि वर्तमान सड़क के मध्य रेखा से दोनों तरफ 17-17 मीटर जमीन ली जानी है।
हड़हवा फाटक के पास सड़क के किनारे स्टेशनरी की छोटी सी दुकान चलाने वाले परवेज कहते हैं कि सड़क चौड़ा होने की सबसे अधिक खुशी उन लोगों को है जिनका मकान सड़क से पीछे था। क्योंकि वर्तमान सड़क के मध्य रेखा से दोनों तरफ 17 मीटर जमीन ली जा रही है।
अब जिनके घर सड़क के किनारे हैं, उनका दो तिहाई से भी अधिक हिस्सा निकल जा रहा है। किसी का चार फिट बच रहा है तो किसी का छह फिट। इतनी जगह में एक दुकान भी नहीं बनेगी। ऐसे में अगली कतार साफ हो जाएगी और पीछे वाले फ्रंट पर आ जाएंगे। अभी तक जो फ्रंट पर हैं वे यहां से उजड़ जाएंगे। वहां खड़े राकेश निषाद इनकी बात का समर्थन करते हुए कहते हैं कि अब तो मोहल्ला ही उजड़ जाएगा।
दुल्हन बनकर आई थी, बुढ़ापे में यही देखना बाकी था
हड़हवा फाटक से हुमायूंपुर चौराहे की तरफ करीब 20 मीटर आगे बढ़ने पर लाइन से मिट्टी के बर्तनों की दुकानें हैं। यहां पांच छह महिलाएं चर्चा कर रही थीं। 65 वर्षीया सुखराजी देवी की आंख डबडबा गई थी। कितना घर बचेगा के सवाल पर कहती हैं कि अब का बताईं बाबू, 45 साल पहले जब वियाह भइल रहे तब, ईहां तक आवे खातिर रिक्शा भी नाई मिले। पैदल आवेके पड़े।
अब पक्का सड़क दुश्मन हो गईल। हमार तो पूरा घरे टूट जाई। इनकी बातों का वहां मौजूद गायत्री प्रजापति, जानकी देवी, सावित्री आदि महिलाएं भी समर्थन करती हैं। सबका कहना है कि सड़क और ओवरब्रिज समय की जरूरत है, लेकिन ऐसा प्रयास हो कि हमारा घर भी बना रहे।
क्योंकि यहां से उजड़ गए तो फिर कहां जाएंगे। इस मोहल्ले के कई परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने, शहर में मजदूरी और धर्मशाला पुल समेत कई जगह ठेला लगाने का काम करते हैं। पुरखों की बनवाए मकान टूटने की सूचना से पूरा मोहल्ला हैरान और परेशान है।
हमारा घर तोड़ेंगे तो हम कहां जाएंगे
स्थानीय नागरिक गणेश प्रजापित ने बताया कि आज जहां रामजानकी नगर बसा है, वहां हमारा अमरूद का बागीचा था। वह जमीन बेचकर यहां हमारे पिताजी ने घर बनवाया था। तीसरी पीढ़ी यहां रह रही है। जितनी हमारी जमीन है, उतने में ही घर बनवाया है, लेकिन अब सब सरकार का है। हमें चौड़ीकरण से आपत्ति नहीं है, लेकिन यहां उजड़ जाना तकलीफदेह है। अगल-बगल कहीं हमें भी रहने को घर दिया जाए। हम और हमारे बच्चे कहां जाएंगे।
केवल बाथरूम बचा रहेगा
मकान मालिक अजय यादव ने बताया कि जमीन खरीदकर तीन मंजिला घर बनवाया है। अब चौड़ीकरण में केवल घर के पिछले हिस्से में बना बाथरूम ही बचा रह पाएगा। चौड़ीकरण के लिए इतनी जगह लिए जाने के चलते जिनके मकान छोटे हैं, वे पूरी तरह से यहां से उजड़ जाएंगे।
सड़क चौड़ीकरण से सब कुछ बड़ा सुंदर दिखेगा, लेकिन जिनकी तीन पुश्तें यहां रह रही हैं, उनके उजड़ने का दर्द महसूस कीजिए। हमारी बस इतनी मांग है कि घर का कम से कम हिस्सा टूटे।