गुरु गोरक्षनाथ की तपोभूमि पर ओम कारम की ओर से राप्ती तट पर गुरु गोरक्षनाथ मल्हार महोत्सव के तीसरे दिन मुख्य अतिथि पद्मश्री गजल गायक चंदन दास ने राप्ती तट पर मां गंगा की आरती की। उन्होंने कहा कि संगीत मानवीय अंतर्भावों की लय एवं तालबद्ध की अभिव्यक्ति है।
भारतीय संगीत अपनी मधुरता, लयबद्धता तथा विविधता के लिए जानी जाती है। जहां बूंद-बूंद रस बरसती रही... शम्मा से रौशनी की बात करो चांद से चांदनी की बात करो, जिने वालों तुम्हें खुदा की क़सम मौत से जिंदगी की बात करो..जीभर के देखा ना कुछ बात थी बडी आरज़ू थी मुलाकात की... इश्क को दर्द सा कहने वाले सूनो कुछ भी हमने दर्द ये सर ले लिया वो निगाहों से बचकर कहां जाएंगे अब तो उनके मुहल्ले में घर ले लिया..
इधर जिंदगी का जनाजा उठेगा उधर जिंदगी की दूल्हन बनेगी.....इस तरफ मोहब्बत की शुरुआत कीजिए इक बार अकेले में मुलाकात कीजिए आदि गजलों की प्रस्तुति का लोगों ने जमकर लुफ्त उठाया
कार्यक्रम का शुभारंभ गोरखपुर के नवोदित स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया। जिसमें प्रमुख रूप से दर्श मिश्रा, प्रिंस शुक्ला, अमन शर्मा ने प्रस्तुति दी। स्वागत उद्बोधन के क्रम में संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नवारुन चटर्जी ने मल्हार महोत्सव में आए हुए अतिथियों का स्वागत किया।
अंतरराष्ट्रीय सरोद वादक भारत रत्न पंडित रविशंकर के शिष्य पंडित पार्थों सारथी द्वारा सर्वोदय वादन और साथ में बनारस घराने के तबला वादक पंडित कुबेर नाथ मिश्र द्वारा जुगलबंदी प्रख्यात की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि शास्त्रीय संगीत को बचाना बहुत जरूरी है।
धन्यवाद ज्ञापन ओम कारम के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत ओझा ने किया। गुरु गोरक्षनाथ मल्हार महोत्सव के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रेस क्लब अध्यक्ष मारकंडे मणि त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे आयोजन गोरखपुर में होते रहने चाहिए।
संचालन मनोज श्रीवास्तव व रीता श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान धरा धाम के डाॅ. सौरभ पांडेय, विनय शर्मा, धर्मेंद्र नारायण दुबे, मनोज यादव, उमेश चंद्र शुक्ल, यतिंद्र मिश्र, सुधीर शर्मा आदि उपस्थित रहे। मंगलवार को पंडित तरुण भट्टाचार्य (संतूर), बंदा बैरागी और नेहा बनर्जी (कथक) अपनी प्रस्तुति देंगे।