शासन तक पहुंची थी मुआवजे के बदले वसूली की शिकायत, 10 कर्मचारी गैर जनपद भेजे गए
नए आठ कर्मचारियों ने शुरू किया कामकाज, जमींदारी भूमि के मुआवजे पर भी फंसा था पेंच
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले के विकास के दौरान चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए मकान व अधिकृत की गई जमीनों के मुआवजे के बदले वसूली करने पर पुराने खिलाड़ी नप गए। उनकी जगह नए लोगों को कमान सौंपी गई है। वसूली की शिकायत पर भूमि अध्याप्ति कार्यालय के सभी 10 कर्मचारियों का गैर जनपद तबादला कर दिया गया।
पता चला है कि गोरखनाथ के रहने वाले कुछ लोगों ने भी सीएम कार्यालय में पत्रक भेजकर कर्मचारियों पर मुआवजा देने के नाम पर रुपये मांगने का आरोप लगाया था। इसके अलावा जमींदारी की जमीन की एनओसी को लेकर भी पेंच फंसा था, जिसकी शिकायत की गई थी। मामला संज्ञान में आने के बाद शासन की ओर से गोपनीय जांच कराई गई तो पला चला कि कार्यालय में तैनात कर्मचारी लंबे समय से यहीं पर जमे हुए हैं। सिर्फ एक कर्मचारी तीन साल से कम समय से था, उसे छोड़कर सभी का गैर जनपद तबादला कर दिया गया है। वहीं, बाहर से आए आठ कर्मचारियों ने कामकाज संभाल लिया है।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, उसके लिए कहीं मकान तोड़े जा रहे हैं तो कहीं पर भूमि का अधिग्रहण हो रहा है। सरकार की मंशा है कि सभी को उचित मुआवजा दिया जाए। इसे देने से पहले जो आंकलन किया जाता है, उसकी जिम्मेदारी भूमि अध्याप्ति विभाग के पास ही है। बीते दिनों सामने आया कि मुआवजा के बदले यहां पर रुपयों की मांग की जा रही है और न देने वालों के मुआवजे पर कोई न कोई आपत्ति लगा दी जाती है।
ऐसे ही पीड़ित चार लोगों ने शासन में शिकायती पत्र भेजा था और फिर वहां से पूछा गया कि कितने कर्मचारी है, जाे लंबे समय से हैं। क्योंकि, शिकायती पत्र में इसका भी जिक्र किया गया था कि यहां पर 20 साल से एक कर्मचारी जमा है, जो यह घुड़की भी देता है कि अगर वह कागज में खेल कर देगा तो पूरे जीवन मुआवजा नहीं मिलेगा।
जवाब में यह साफ हो गया कि कार्यालय में तैनात कुल 11 में से एक को छोड़कर सभी 10 कर्मचारी लंबे समय से यही पर जमे हुए हैं। इसके बाद शासन के पत्रक के अनुपालन में 24 जनवरी को ही सभी 10 कर्मचारियों का गैर जनपद तबादला कर दिया गया। कोई सिद्धार्थनगर भेजा गया तो कोई बस्ती। वहीं दो लोग आजमगढ़ भेजे गए हैं।
कोट
तीन साल से अधिक समय से काम कर रहे 10 कर्मचारियों तबादला किया गया है। उनकी जगह पर नए कर्मचारी आ गए हैं, जो अपना काम काज भी शुरू कर दिए हैं। किसी तरह की शिकायत की बात सामने नहीं आई है।
सुशील गौड़, भूमि अध्याप्ति अधिकारी