गोरखपुर विश्वविद्यालय के हीरक जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दो बच्चों ने स्टेज पर जो प्रस्तुति दी, हम सब यही चाहते हैं की शिक्षा के क्षेत्र से ऐसे बच्चे निकले जो देश का नेतृत्व करें।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था मुझे 100 युवा दीजिये मैं देश में परिवर्तन लाऊंगा। कुशीनगर, देवरिया और गोरखपुर में जिस तरह प्रतियोगिताओं हुई वो देखकर खुशी हुई। चार लोग आए, भाषण दें और फोटो खिचवाएं तो उसका महत्व नहीं। आंगनबाड़ी से जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी तो देश आगे बढ़ेगा।
यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल देने आती हूं तो इतना उत्साह नहीं होता। आज बच्चों ने गोल्ड मेडल लेना सीख लिया। जब आयोजन या चहल पहल शुरू होती है तब बच्चें घर, खेत रोड पर प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं। ऐसी प्रतियोगिताएं ही बच्चों को निखरती हैं। भाषण में विषय ऐसा होना चाहिए जो समाज की समस्याओं को उभारें।
जब ये सुनेंगे तो उसपे विचार करेंगे। लेखन में अलग अलग विषय होना चाहिए। काव्य लेखन, एक बच्चे ने शिक्षक पर शानदार प्रस्तुति दी। उसने शिक्षक का महत्व बताया जो शिक्षकों ने भी नहीं सोचा होगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आठ को है। आज हर क्षेत्र में महिलाएं काम कर रही हैं।
एक समय था जब हमारी तीन महिलाएं वर्ल्ड टूर पर निकली हैं जो 15 देशों का भ्रमण कर आयेंगी। राजभवन में मिलने आईं तो बताया कि वे अलग अलग देशों में महिलाओं की स्थिति पर स्टडी करती हैं। उन्होंने अलग अलग देशों का उदाहरण दिया। बताया कि महिलाएं केवल किचन तक सीमित हैं।
किचन के पास कमरे बने हैं, जहां वे खाना बनाती और फिर वहीं बैठ जाती हैं। तब पता चला कि अपने देश की स्थिति काफी अच्छी है। 50 साल से महिलाओं की स्थिति को लेकर काम कर रही हूं। पढ़ती थी तब साथ में कोई लड़की नहीं थी। आज कॉलेज में बेटियों की संख्या ज्यादा है।
आने वाले समय में 80 प्रतिशत महिलाएं ही होंगी। आज बेटियों ने ज्यादा पुरस्कार जीते हैं। 20 साल बाद पुरुषों के लिए योजनाएं बनानी पड़ेंगी कि वो कैसे आगे बढ़ें। सोचना तो अब पुरुषों को पड़ेगा। कोई भी संस्थान हो इसमें समाज को शामिल करना चाहिए। कई प्रकार के अनुभव लोगों के पास हैं।
यूनिवर्सिटी को 75 साल हो गए हैं। महिला या पुरुष 75 साल बाद चल नहीं पाते, रोग से ग्रसित हो जाते हैं। यूनिवर्सिटी को अब युवानी आई है। देश को विकसित भारत बनाने वाले यही युवा हैं। पीएम का सपना है जब हम आजादी का 100 वर्ष मनाएंगे तब खुद को विश्व के सामने विकसित के रूप में प्रस्तुत करेंगे। हम सभी कमियों को दूर करेंगे।
बच्चों के सभी भाषण को मिलाकर एक किताब बनाएं। उसमें फोटो लगाएं। छोटी सी किताब बनाकर स्कूल में रखें। कॉलेज वाले समझ गए कि नैक में जाने के लिए डॉक्यूमेंट की जरूरत रहती है। पेंटिंग हो या वाद विवाद उसकी भी बुक होनी चाहिए। अधिकारियों से साइकिल यात्रा के बारे में बात कि तो उनको बताया कि बच्चे 150 किमी तक हर चीज को देखते जाएं।
1992 को याद करते हुए अपना अनुभव साझा किया और कहा, जब पाकिस्तान के आतंकियों ने देश के नेतृत्व को कहा कि श्रीनगर के लाल चौक पर अपना राष्ट्र ध्वज फहराएं। उस समय स्थिति ऐसी थी कि महिलाएं सुरक्षित नहीं थी। उस समय अटल जी ने चैलेंज स्वीकर किया। कहा कि 26 जनवरी को सुबह 9 बजे ध्वज फहराएंगे।
देश की यात्रा से होकर वहाँ सब पहुंचे। ये पूरा आयोजन नरेंद्र मोदी ने किया। 250 कार्यकर्ता अटल विहारी वाजपेई के साथ पहुंच कर राष्ट्र ध्वज फहराया। उस समय गुजरात से इकलौती महिला थी। आज कश्मीर की स्थिति अलग है। परिवर्तन राष्ट्रवादी युवा की कर सकते हैं। देश को संभालने का काम ऐसे ही लोग कर सकते हैं।
साइकिल यात्रा की बात आई तो उसकी सुरक्षा की बात आई। रोड पर साइकिल या कोई गाड़ी कैसे चलानी चाहिए। युवा रील बनाकर डाल रहे इसमें कई लोग मर गए। स्कूटर पर चलते हुए रील बनाते हैं, फिर कोई गाड़ी टकराते ही शव यात्रा निकलती है।
रोड पर हमें किस तरह चलना चाहिए इसके बारे में समझना पड़ेगा। यात्रा का उद्देश्य है कि 25 बच्चे पूरे डिसिप्लिन के साथ चलें। विद्यार्थी प्रतिज्ञा लें कि हम दहेज न लेंगे और न देंगें। नशा न करें। अपील करती हूं कि अपने परिवार और बच्चों के लिए इतना तो करो। इसे त्याग दें, कई पीढियाँ सुधर जायेंगी। फोन की वजह से पढ़ना छोड़ दिया है। 45 मिनट पढनें का काम करें। कहीं भी पढ़ो लेकिन कुछ न कुछ पढ़ो।
समाज के सहयोग से 2000 बेटियों को hpv वैक्सीन दिया जाएगा। देश में सबसे ज्यादा महिलाओं में कैंसर यूपी में है। इसे राजभवन से प्रारंभ किया गया है। धीरे धीरे पूरे यूपी और गुजरात में चलाया है। वैसे तो इसमें सरकार को मदद करनी चाहिये लेकिन पता नहीं क्यों नहीं करती।
लगभग तीन लाख से ज्यादा मरीज टीबी से बाहर आये हैं। अपनी इनकम का एक हिस्सा इन कामों में भी लगाएं। सब काम सरकार नहीं कर सकती। प्राथमिकता होती है उसे बढ़ावा देना पड़ता है। आज खुशी हुई कि वैक्सीन के लिए समाज आगे आ रहा है।
कहीं भी जाएं बेटियों और माताओं का समान करें। वृधाश्रम बढ़ रहे हैं गाय को हम छोड़ रहे हैं। दूध दही मक्खन खाने के बाद गाय को छोड़ दे रहे हैं। ऐसा न करें। बच्चे आगे बढ़ेंगे तो देश अपने आप आगे बढ़ेगा।