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Gorakhpur News: मेडल के नाम पर कुछ नहीं.. खेल कोटे में हो गई थी एडीजी दफ्तर में संबद्धता

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दूसरी जगह ट्रांसफर होने के बाद एडीजी दफ्तर में सबद्ध हो गया था लिपिक
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संतकबीनगर के एसपी की जांच में पहला मामला खुलने के बाद जांच बढ़ी थी आगे
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एडीजी कार्यालय में ड्यूटी करते हुए जमीनों का खेल करने का मामला करीब दो महीने पहले सामने आया था। दरअसल, खेल कोटे में भर्ती इन पुलिस कर्मियों के पास मेडल के नाम पर कुछ नहीं था। एडीजी केएस प्रताप ने जब इस पर संदेह जताया और इसकी गोपनीय जांच कराई तब मामला खुलने लगा।
इसके बाद पुलिस कर्मियों को उनकी मूल तैनाती पर भेजा गया। इसी दौरान पता लगा कि एडीजी कार्यालय के गोपनीय सहायक (सीए) की तो संबद्धता ही गलत है। उसका संतकबीरनगर जिले से कहीं और ट्रांसफर हुआ था, लेकिन वह अपने जुगाड़ के दम पर एडीजी कार्यालय से संबद्ध हो गया था।
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एडीजी कार्यालय में हुई एक गोपनीय जांच के आधार पर 52 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है। करीब दो महीने पहले एडीजी केएस प्रताप ने जब अपने कार्यालय का निरीक्षण किया, उस दौरान इतनी बड़ी संख्या में खेल कोटे से पुलिस कर्मियों की सबद्धता उन्हें खटक गई। ऐसा इसलिए कि इनमें से किसी के पास कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि नहीं थी, जिस वजह से उन्हें यहां रोका जाए। एडीजी को पहले यह समझाया गया था कि पिछले एडीजी, खेल से जुड़े थे, लिहाजा पुलिस कर्मियों ने यहां से खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया। हालांकि, संदेह होने पर सबसे पहली जांच सीए अमित श्रीवास्तव की हुई।
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संतकबीरनगर के एसपी से जांच कराई गई तो पता लगा कि उसका ट्रांसफर कहीं और हुआ था, लेकिन जुगाड़ लगाकर उसने खुद को एडीजी कार्यालय से संबद्ध करा लिया। इसी तरह कुछ और पुलिस कर्मी भी हैं, जिनको खेल कोटे का बताकर संबद्ध किया गया है, लेकिन वे किसी खेल से संबंधित ही नहीं थे। फिलहाल इस मामले में सीए को संबद्ध कराने के भूमिका की भी जांच हो रही है। चर्चा है कि इसमें दो पुलिस कर्मियों पर गाज गिर सकती है।

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