गोरखपुर। एक अवैध अस्पताल के सील होते ही उससे मिलते-जुलते नाम और स्थान पर दूसरा अस्पताल खोलना अब संभव नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मिलते-जुलते नाम से दूसरे अस्पताल का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाॅफ को उसी अस्पताल में एक साल तक सेवा देने का शपथपत्र भी देना होगा।
मरीज-माफिया के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों पर लगाम कसने की कवायद तेज कर दी है। सीएमओ ने अब तक चल रहे नियम में कुछ और उप नियम जोड़ते हुए नया आदेश जारी किया है। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भी दी गई है। 23 बिंदुओं वाले इस नए नियम के आधार पर 30 अप्रैल तक आवेदन होगा। इसके बाद इस साल का नया पंजीकरण नहीं होगा।
नए नियमाें में आवेदन के सात दिन के अंदर डॉक्टर व सभी पैरामेडिकल स्टॉफ के डॉक्यूमेंट का भौतिक सत्यापन सीएमओ कार्यालय में अनिवार्य होगा। डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ एक ही अस्पताल में ड्यूटी करेंगे। अस्पताल भवन का नक्शा मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट से बनवाकर छायाप्रति जमा करनी होगी। डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ को वर्तमान निवास का स्वप्रमाणित पता उपलब्ध कराना होगा।
ट्रामा सेंटर के लिए न्यूरो एवं आर्थो स्पेशलिस्ट की 24 घंटे उपलब्धता अनिवार्य होगी। आईसीयू के लिए तीन चिकित्सक व तीन पैरा मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति जरूरी होगी। अस्पताल गेट पर पीले बैकग्राउंड में काले अक्षर से उन डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ का नाम लिखना होगा, जो अस्पताल में पंजीकृत हैं।
सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे ने बताया कि 50 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों के पंजीकरण के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। इसका कड़ाई से पालन कराया जाएगा। 30 अप्रैल तक जो आवेदन पंजीकरण के लिए आएंगे, उनमें इन मानकों का ध्यान रखा जाएगा।
नवीनीकरण के लिए भी यही मानक लागू किए जाएंगे। इसका उल्लंघन होने पर न तो नया पंजीकरण होगा न ही नवीनीकरण किया जाएगा। बिना पंजीकरण के संचालित अस्पतालों के खिलाफ अब केस दर्ज कराया जाएगा।