गोरखपुर। नजूल अध्यादेश-2024 को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। इस बीच कलक्ट्रेट में भीड़ बढ़ गई है। जिस नजूल बाबू के कमरे में सन्नाटा पसरा रहता था, अब वहां लोग पहुंचने लगे हैं। पुराने रिकॉर्ड निकलवाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि नजूल की जमीन का रिकॉर्ड कुछ लोगों के पास उर्दू में है। उसका ट्रांसलेशन कराने के लिए लोग परेशान हैं। वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास दस्तावेज पुराने होने के चलते पढ़ने में नहीं आ रहे हैं। वे लोग रिकॉर्ड निकलवाने के लिए दौड़ रहे हैं। नजूल की जमीन को लेकर पट्टेदारों की सांसें अटकी हुई हैं। सिविल लाइंस और रेलवे स्टेशन के पास ही करीब 100 से ज्यादा लोगों ने पट्टा कर रखा है। लेकिन, फ्री होल्ड न होने से अब जमीन हाथ से जाने का डर भी सता रहा है।
आरटीओ से हुआ एसएसपी आफिस...तीन लोगों के दावे से लटका फ्री होल्ड
शहर में नजूल की जमीनों पर कुछ लोगों ने जानबूझकर डाला था अड़ंगा, अब सरकार करेगी जब्त
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिविल लाइंस में इस समय जहां एससपी कार्यालय है, कभी आरटीओ कार्यालय था। नजूल की इस जमीन को भी शहर के रईस चौधरी परिवार को आवंटित किया गया था। बाद में दो और लोगों ने भी इस पर दावा कर दिया। इसके चलते यह जमीन फ्री होल्ड नहीं हो पाई। नजूल अध्यादेश-2024 के तहत यह जमीन भी सरकार के कब्जे में हो जाएगी।
इस जमीन का रकबा करीब दो एकड़ का है। इसे पहले चौधरी राम लखन के परिवार को टाइम बांड पट्टा आवंटित किया गया। यह पट्टा भी 90 साल का था। बाद में इस पर डॉ जोशी ने दावा ठोंक दिया। इसके बाद अंशुमान सिंह ने इसका कुछ हिस्सा बताकर टीनशेड डलवा दिया। मामला उलझा तो कोर्ट में पहुंच गया। इसके चलते नजूल की जमीन फ्री होल्ड नहीं हो पाई। अब इस जमीन पर तलवार लटकने लगी है।