गिरोह में चार महिलाओं समेत पांच आरोपी शामिल, अधिवक्ता के खिलाफ साक्ष्य नहीं
दो सीओ की जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ था केस, दो साल बाद माथे से मिटेगा कलंक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले के अलग-अलग थानों में दुष्कर्म के फर्जी केस दर्ज कराकर रुपये ऐंठने वाले गिरोह में चार महिलाएं व उनका एक पुरुष साथी शामिल हैं। पुलिस ने अपनी जांच में पांच लोगों को दोषी पाते हुए कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। अब कोर्ट ने इस प्रकरण में संज्ञान लिया है।
हालांकि, केस में एक अधिवक्ता को भी आरोपी बनाया गया था, जो दर्ज सभी मामलों में पैरवी कर रहे थे। पुलिस की जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद उनका नाम आरोप पत्र से बाहर कर दिया गया। अब कोर्ट से आरोपियों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है तो वहीं लंबे समय से माथे पर दुष्कर्म के केस का कलंक लिए लोगों का दाग मिटने वाला है।
जानकारी के मुताबिक, दुष्कर्म में जेल की सजा काटने और मामले से बरी होने वाले कैंपियरगंज के खालिद ने मई 2022 में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर इस गिरोह की जानकारी दी थी। इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने जांच सीओ कैंट को सौंपी। सीओ ने रिपोर्ट एसएसपी को दी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 11 आपराधिक केस में चार महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग आरोपी दिखाए गए हैं।
सीओ की जांच में सामने आया कि मुकदमों में अलग-अलग आरोपी भी हैं, जबकि वादिनी मात्र चार ही हैं। सभी मामलों में न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज हुए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सात अगस्त 2022 को केस दर्ज कर लिया गया। तभी से जांच की जा रही थी। अब जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया गया।
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गिरोह की सरगना नफीसा, दो साल चली जांच
गिरोह में पुलिस की जांच में गिरोह की सरगना नफीसा पाई गई है। इसके अलावा विंद्रावती, सोनी, तारा चौहान और फतेह मोहम्मद को आरोपी बनाया गया है। सभी की अलग-अलग भूमिका सामने आई है। सब किसी न किसी केस में वादी हैं।
वर्जन
सत्य की जीत हुई है। पुलिस की ओर से भेजे आरोपपत्र से पूरी तरह संतुष्ट तो नहीं हूं। पूरी केस डायरी पढ़ने के पश्चात पीड़ितों की तरफ से आरोपियों को न्यायालय से सख्त से सख्त सजा दिलाने का प्रयास करूंगा।
- मृत्युंजय राज सिंह, उपाध्यक्ष, बार एसोसिएशन