गोरखपुर। हम सभी को विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन बुनियादी तौर पर कुरआन व हदीस के इल्म के बारे में जानना चाहिए।
ये बातें अलहदादपुर इमामबाड़ा के पास आयोजित दो दिवसीय सालाना जलसा के पहले दिन रविवार को मुख्य वक्ता मौलाना मसऊद अहमद बरकाती ने कहीं। विशिष्ट वक्ता मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि इस्लाम में यतीमों, बेवाओं और मजलूमों का खास ख्याल रखा गया है। विशिष्ट वक्ता नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी व मुफ्ती मुनव्वर रजा ने कहा कि इस्लाम में खाने-पीने, सोने यहां तक कि इस्तिंजा करने का तरीका भी बताया गया है। रास्ता चलने के आदाब भी बयान किए गए हैं। अल जामियतुल अशरफिया मुबारकपुर के मुफ्ती निजामुद्दीन मिस्बाही ने अवाम के सवालों का जवाब दिया।
कुरआन-ए-पाक की तिलावत कारी शादाब रजा ने की। अंत में सलातो सलाम पढ़कर अमनो अमान की दुआ मांगी गई। जलसा की अध्यक्षता कारी शराफत हुसैन कादरी व संचालन मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने किया। जलसे में मुफ्ती अख्तर हुसैन, मौलाना महबूब आलम, कारी रईसुल कादरी, कारी अब्दुल हफीज, एजाज अहमद आदि मौजूद रहे।