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Gorakhpur News: निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, ऑपरेशन के पहले रखवा लिए थे 40 हजार;परिजनों ने किया हंगामा

Sun, 04 Jan 2026 01:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भटहट

सार

आरोप है कि महिला को गंभीर स्थिति में अस्पताल संचालक ने परिजनों की अनुमति के बिना अपने निजी वाहन में बैठाकर बीआरडी मेडिकल काॅलेज के गेट पर छोड़ दिया, जहां उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। आरोप है कि वह अस्पताल लौटकर तोड़फोड़ करने लगे।
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अस्पताल में हंगामा करते लोग।
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विस्तार
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महराजगंज जिले के श्यामदेउरवां निवासी ऋतु (32) की शनिवार को गुलरिहा थाना क्षेत्र के तरकुलहा स्थित निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान मौत हो गई। इस दौरान बच्चे की भी जान चली गई। इससे परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और अस्पताल के बाहर हंगामा के साथ तोड़फोड़ करने लगे।

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सूचना पर गुलरिहा पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। मामले में अस्पताल संचालक इम्तियाज और डॉक्टर जावेद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सुनील कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी ऋतु प्रसव के लिए अपने मायके गुलरिहा के परसौना आई थी।

सुबह करीब नौ बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिवार उसे तरकुलहा चौराहे स्थित निजी अस्पताल लेकर गया। सुनील का आरोप है कि अस्पताल संचालक ने इलाज शुरू करने से पहले 40 हजार रुपये जमा करवा लिए। कुछ ही समय में महिला की हालत गंभीर हो गई। परिजनों की ओर से डॉक्टरों से जानकारी मांगने पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
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आरोप है कि महिला को गंभीर स्थिति में अस्पताल संचालक ने परिजनों की अनुमति के बिना अपने निजी वाहन में बैठाकर बीआरडी मेडिकल काॅलेज के गेट पर छोड़ दिया, जहां उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। आरोप है कि वह अस्पताल लौटकर तोड़फोड़ करने लगे।

सूचना मिलने पर सीओ गोरखनाथ रवि सिंह और गुलरिहा थाना प्रभारी विजय सिंह मौके पर पहुंचे। कार्रवाई का भरोसा देकर शांत कराया। थाना प्रभारी ने बताया कि महिला के पति की तहरीर पर अस्पताल संचालक और डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हॉस्पिटल सील करने के लिए सीएमओ को रिपोर्ट भेजी जा रही है।

तीन साल पहले भी हुआ था सील
जांच में यह भी सामने आया है कि यह अस्पताल तीन साल पहले अवैध होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से सील किया गया था। एडिशनल सीएमओ डॉ. अनिल सिंह की मौजूदगी में भवन को सील किया गया था और स्वास्थ्य विभाग की सूची में आज भी इसका नाम दर्ज है।

बावजूद इसके आरोप है कि नाम बदलकर दोबारा रजिस्ट्रेशन कर अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय लोग और परिजन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अवैध अस्पताल को पहले ही बंद रखा गया होता तो शायद महिला और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल संचालक और स्टाफ भाग गए हैं।

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