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माया महा ठगनी: रामलीला ग्राउंड से जुड़ा राम का नाम, कर रहे बदनाम- पढ़ें पूरी कहनी

Tue, 20 Feb 2024 03:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से ज्ञापन कर रामलीला कमेटी को वार्ड की राजनीति के नाम पर बदनाम करने का लगाया आरोप। दोनों पक्ष से गंभीर आरोपों के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी।
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रामलीला कमेटी की प्रवेश द्वार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहर में करीब डेढ़ सौ साल पुराने रामलीला ग्राउंड से भगवान श्रीराम का नाम जुड़ा है, लेकिन आजकल यह गलत वजहों से चर्चा में है। शहर में रामलीला के आयोजनों के लिए सुविख्यात यह मैदान अब व्यावसायिक इस्तेमाल की वजह से कुश्ती के अखाड़े जैसा नजर आने लगा है।
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बवाल की जड़ एक वायरल वीडियो है, जिसके बाद रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों पर आरोप लगने शुरू हो गए। इसके बाद पदाधिकारियों ने दूसरे पक्ष को भी निशाने पर ले लिया। मामला अब सीएम योगी तक पहुंच गया है। जांच भी शुरू हो गई है।हालांकि इन सबके बीच विवादों से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं।

एक साल से चल रहा विवाद 22 जनवरी की शादी ने गहरा दिया
बर्डघाट स्थित रामलीला ग्राउंड के हाॅल को मैरिज हाॅल के रूप में इस्तेमाल करने का मामला गहराता जा रहा है। इसको लेकर विवाद तो वैसे एक साल से है, लेकिन  22 जनवरी 2024 को हुए एक वैवाहिक आयोजन के बाद यह बढ़ गया। आरोप-प्रत्यारोप के दौर शुरू हो गए। पूरे प्रकरण में रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और पार्षद पति आमने-सामने हो गए हैं।
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दरअसल, 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान ही बर्डघाट रामलीला मैदान को कार्यक्रम के लिए पार्षद के पति दिनेश गुप्ता ने मांगा था। उनका आरोप है कि पूरे देश में कार्यक्रम हो रहे थे, लेकिन उस दिन उन्हें न देखकर एक शादी समारोह का आयोजन कराया गया।

जबकि, इसका उद्देश्य ही धार्मिंक, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन है। इसके बाद से ही यह मामला गहराते चला जा रहा है। हालांकि, पूरे प्रकरण में डीएम ने जांच का आदेश दे दिए हैं। उधर, रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने सीएम पोर्टल पर पार्षद पति पर कई गंभीर आरोप लगा दिए। इसकी भी जांच ब शुरू हो गई है।

जानकारी के मुताबिक, बर्डघाट रामलीला कमेटी का जीर्णोद्धार पर्यटन विभाग की ओर से किया गया। इसके बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी डीएम की मौजूदगी में रामलीला कमेटी ट्रस्ट को दे दी गई। उस समय जो शर्त तय किया गया, उसके हिसाब से यहां पर प्रशासन की ओर से होने वाले धार्मिंक, सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हॉल नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाना था और अगर किसी संस्था को इस तरह के कार्यक्रम को करना है तो उसके लिए बाजार से कम दाम पर उपलब्ध कराना था।

मकसद था कि इससे होने वाले आमदनी से खर्च निकल जाए। लेकिन, अब पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। हॉल को वास्तव में कई बड़े लोगों को शादी के लिए दिया गया है। इसके पीछे रामलीला कमेटी का तर्क है कि वह काफी पहले बुकिंग करा लिए थे और खर्च के लिए बुकिंग की अनुमति है।

वहीं, पार्षद के पति दिनेश गुप्ता का कहना है कि वह रामलला के कार्यक्रम के लिए 16 जनवरी से ही पत्र भेज रहे थे, अध्यक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद पता चला कि 22 जनवरी को वहां पर शादी हुई, जिसमें डांस भी हुआ था, जो नियम विरुद्ध है।
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पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शासन से आए निर्देश के बाद पर्यटन विभाग की ओर से रामलीला हाॅल के जीर्णोद्धार का काम कराया गया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद संचालन की जिम्मेदारी वर्षों पुरानी रामलीला ट्रस्ट को दे दिया गया।

इसके शर्तों में है कि प्रशासन के कार्यक्रम के लिए नि:शुल्क हॉल उपलब्ध कराया जाएगा। गरीब बेटियों की शादी के लिए मुफ्त दिया जाना है। कोई संस्था अगर सांस्कृतिक कार्यक्रम कर रही है तो फिर उसके लिए बाजार से न्यूनतम शुल्क लिया जाना है, ताकि रखरखाव हो सके। आला अफसरों की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद ट्रस्ट को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आय-व्यय के लिए प्रशासनिक अफसर और कमेटी का संयुक्त खाता भी खुलना शर्तों में है।


आमने-सामने
पार्षद के पति दिनेश गुप्ता
ने आरोप लगाया कि डीएम की बैठक में ही तय हुआ था कि अर्जित आय को अपर जिलाधिकारी के निर्देशन में बैंक खाते खुलवाने के बाद नियमानुसार संचालित किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मनमाने तरीके से संचालक शादी-ब्याह के लिए रुपये ले रहे हैं और इसमें घालमेल भी चल रहा है।

टेंडर के साथ नियमों में कमेटी की तरफ से मनमाने तरीके से पेंसिल से लिखकर दे दिया गया। बहुत से नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते हैं। मूल मुद्दे से भटकाकर रामलीला कमेटी अपने गलत कामों को छिपाने के लिए सपा नेता का नाम लेकर मामले को तूल दे रही है। पूर्व में सराफा मंडल के कई पदाधिकारी भी सपा नेताओं के संपर्क में थे।

22 जनवरी 2024 को धार्मिक आयोजन के लिए ग्राउंड को मांगा गया था, लेकिन नहीं दिया गया और उसी तिथि को वैवाहिक आयोजन के लिए बुक कर लिया गया। ऐसे में परिवार के अन्य लोगों और प्रतिनिधियों ने दूसरी जगह भव्य आयोजन मनाया था। 22 जनवरी ही नहीं, जब भी परिसर को निर्धन कन्याओं या अन्य धार्मिक कार्यों के लिए मांगा गया, नहीं दिया गया। मेरी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

रामलीला कमेटी के संरक्षक एवं अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि साढ़े तेरह लाख रुपये में मैदान को संचालित करने का टेंडर दिया गया है। कमेटी की तरफ से बाकायदा चार्टर्ड एकाउंटेट से आय-व्यय का मिलान कर इसे संरक्षित रखा जाता है।

इसमें अर्जित आय से टेंडर संचालक को दशहरा के पूजा में छह से सात लाख रुपये कमेटी को देना होता है। 18 दिन तक भव्य रामलीला आयोजन का कार्यक्रम होता है। रामलीला कमेटी की तरफ से दिए गए नियमों के अनुसार ही इसका संचालन होता है।

निर्धन कन्याओं का विवाह भी किया जाता है। लेकिन, इनके नामों को सार्वजनिक कर किसी के मान-सम्मान को ठेस नहीं पहुंचे, इस मंशा के साथ इसे गोपनीय रखा जाता है। जरूरत पड़ी तो उचित पटल पर इसे भी रखा जाएगा।

डीएम की संस्तुति पर बैठक के बाद रामलीला कमेटी को इसके संचालन और आय-व्यय के वहन का जिम्मा दिया गया था। इसमें किसी प्रकार नियमों की अवहेलना नहीं हुई है। वार्ड की राजनीति के चक्कर में रामलीला कमेटी को बदनाम किया जा रहा है। जहां तक बैंक खाता खोलने की बात है तो दो बार लिखित और कई बार भौतिक रूप से संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर अनुरोध किया जा चुका है।

इसका रिकाॅर्ड भी उपलब्ध है। 22 जनवरी की बुकिंग छह महीने पहले ही हो चुकी थी। इस बात को कई बार दिनेश गुप्ता को बताई गई थी।
 
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