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Gorakhpur News: मैपिंग शुरू, अब रेड मारकर साइबर जालसाजों को पकड़ेगी पुलिस

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- जालसाजी में इस्तेमाल किए गए तीन हजार नंबरों को साइबर अपराध थाने ने कराया बंद
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- एआई तकनीक से फर्जी आधार कार्ड बनाकर सिम लेने वालों पर कसा शिकंजा

- झारखंड और राजस्थान से हो रही सर्वाधिक जालसाजी

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिले में ऑनलाइन जालसाजी के केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस अब जालसाजों तक पहुंचने का प्लान तैयार करने में जुट गई है। झारखंड, राजस्थान और दिल्ली में बैठे जालसाज देश भर में जालसाजी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। किन राज्यों से अधिक जालसाजी की वारदातों को अंजाम दिया गया है, इसके लिए साइबर अपराध थाने की पुलिस ने मैपिंग शुरू कर दी है। अब जालसाजों को रेड मारकर पकड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

जिले में डिजिटल अरेस्ट, शेयर के नाम पर पैसे लगाने, सट्टेबाजी, गेम, सेक्सटॉर्शन, रिश्तेदार बनकर, ओटीपी मंगाकर, बिजली बिल जमा करने का लिंक भेजकर समेत करीब 25 तरीके से जालसाज जालसाजी कर चुके हैं। वे हमेशा जालसाजी का नया तरीका अपनाते हैं।
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जालसाजी का पर्दाफाश करने के लिए साइबर थाना और साइबर सेल अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी मदद ले रही है। एआई तकनीकी से तैयार एक साॅफ्टवेयर की मदद से फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र बनाने वालों की पोल खोली जा रही है। साथ ही फर्जी दस्तावेज पर सिमकार्ड लेने वाले भी पकड़े जा रहे हैं।

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फेक कॉल पर तीन हजार नंबर बंद
जिले में साइबर जालसाजी में इस्तेमाल किए गए नंबरों को भी तेजी से बंद कराया जा रहा है। अभी साइबर अपराध थाने की पुलिस ऑनलाइन ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन हजार नंबरों की शिकायत कर उन्हें बंद करा चुकी है। साथ ही फेक वाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप भी बंद कराए गए हैं।

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दिल्ली में तैयार किए जाएंगे साइबर कमांडो
सितंबर में दिल्ली के ट्रेनिंग सेंटर में देश भर के हर जिले से तीन-तीन पुलिस कर्मियों को बुलाकर स्पेशल ट्रेनिंग दी जानी है। गोरखपुर से तीन पुलिस कर्मियों के नाम का चयन कर लिया गया है। इस स्पेशल ट्रेनिंग में मौजूदा समय में हो रहे साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों को दक्ष बनाया जाएगा।
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वर्जन
साइबर अपराध से निपटने के लिए एक पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन (पीपीटी) तैयार की गई है। इसका लिंक सभी स्कूलों और ग्रुप बनाकर उसमें शेयर किया जाएगा। पीपीटी में वर्तमान में हो रहे साइबर अपराध के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसकी मदद से लोग जागरूक होंगे तो जालसाजी की घटनाएं भी कम हो जाएंगी। कुछ पुलिस कर्मियों की विशेष ट्रेनिंग भी कराई जानी है। अब जालसाजों तक पहुंचने की भी योजना बन रही है।
-सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम
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