पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जाग्रत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार आदि कार्यों का निषेध किया गया है।
हरिशयनी एकादशी बृहस्पतिवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से पूजन कर भगवान विष्णु की अराधना की। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के साथ ही बृहस्पतिवार से मांगलिक कार्य रुक गए। अब 23 नंवबर यानी देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे, फिर मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।
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पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जाग्रत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार आदि कार्यों का निषेध किया गया है। लेकिन, कुछ कार्य इस समय भी किए जाते हैं। इनमें पुंसवन, प्रसूति स्नान, इष्टिका दहन, नामकरण, अन्नप्राशन, व्यापार आरंभ आदि शामिल हैं।
श्याम के भजनों पर झूमें भक्त
गोरखपुर। हरिशयनी एकादशी के अवसर पर श्याम मंदिर कालीबाड़ी में भजन संध्या का आयोजन श्री श्याम मंडल न्यास की ओर से किया गया। इस अवसर पर देर रात श्रोता श्याम के भजनों पर झूमते रहे।कार्यक्रम में कानपुर से आए भजन गायक राजू गुप्ता व किरन गुप्ता ने अपने भजनों से सराबोर कर दिया। ''''सब देख रहे बाबा'''', ''''दिलदार कन्हैया ने'''', ''''मेरी नैया का तू किनारा है'''' आदि भजनों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। इससे पूर्व श्याम मंदिर स्थापना दिवस पर संस्था के कोषाध्यक्ष सुधीर टिबड़ेवाल ने ज्योत लेकर कार्यक्रम को शुभारंभ किया। श्याम मंदिर का श्रृंगार आलोक केडिया के सहयोग से हुआ। सवामणी भोग श्रीराम निरंजन टिबड़ेवाल (मुम्बई) ने कराया। संस्था के अध्यक्ष विकास केजरीवाल, मंत्री किशन गोयनका, वासुदेव कटारूका, निर्मल जालान, अभय अग्रवाल, सज्जन जालान, कुंज बिहारी पोद्दार, संतोष आदि भक्त मौजूद रहे।