- जनता की शिकायतों की अनदेखी करने वाले 86 पुलिसकर्मी थाने से हटाए गए थे, कई और राडार पर
- धारा 307 की जगह 308 दर्ज करने वाले पुलिस कर्मियों की खुली फाइल, अब पीड़ित से मांग रहे माफी
- आईजी ने जताई थी नाराजगी, एसएसपी ने पकड़ा पुलिस वालों का खेल, सेटिंग करने वाले 70 सिपाही एक साथ हटाए गए थे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। थाना-चौकी में तैनाती पाने के बाद जनता की अनदेखी करने वालों पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर की नजर टेड़ी हो गई है। अब उन्होंने पुलिस वालों की कारगुजारी का पता लगाने के लिए एलआईयू की गोपनीय टीम लगा दी है। इसी की मदद से बीतों दिना एसएसपी ने एक साथ 70 सिपाहियों सहित 84 पुलिस वालों को थाना, चौकी से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया था, अब वह खुद को शरीफ बताते घूम रहे हैं।
खबर है कि अभी कई और पुलिस वालों की सूची तैयार की जा रही है, जो विवेचना में हत्या की कोशिश की धारा (307) की जगह गंभीर मारपीट की धारा (308) लगा रहे हैं। इनकी भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और आने वाले दिनों में इन पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, थाना में धारा को घटाने और बढ़ाने का मामला नया नहीं है। लेकिन, इस समय कुछ पुलिस वालों ने इसे आरोपी को बचाने का हथियार बना लिया था। आईजी जे रविंद्र और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के पास इस तरह की शिकायतें बढ़ीं तो आईजी ने चंद दिनों पहले मीटिंग लेकर एसएसपी को इस पर सख्ती करने का आदेश दिया।
एसएसपी ने भी अपने स्तर से एलआईयू जांच करा दी और फिर हर थाने के दो-तीन ऐसे सिपाही सामने आ गए, जो साहब के खास बनकर ऐसे कामों को कर रहे थे। सभी की एक साथ सूची तैयार कराकर एसएसपी ने लाइनहाजिर कर दिया था।
फिर दूसरे लिस्ट में 13 दरोगा ऐसे पाए गए थे, जिन्हें पुलिस लाइंस भेज दिया गया था। एसएसपी के इस कार्रवाई के बाद विभाग में चर्चा आम हो गई है कि थाने के पाकेट को ही हटा दिया गया है।
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कोट
शासन की मंशा के अनुरूप जनता को त्वरित न्याय दिलाना प्राथमिकता है। जिन पुलिस वालों ने प्रार्थनापत्र पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की थी या फिर विवेचना में दरोगा ने लापरवाही की थी, ऐसे लोगों को थाने से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया गया है। कोई भी लापरवाही करेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी