मंगलवार को मोहद्दीपुर स्थित उनके आवास पर जाने के बाद पता चला कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। घर के बाहर और भीतर खामोशी थी। उनके मैनेजर और दो कर्मचारी एक कक्ष में बैठे मिले जिन्होंने उनके अस्वस्थ होने की सूचना दी। नगर महापालिका से 1989 में गोरखपुर नगर निगम का गठन हुआ था।
तब 30 वार्ड हुआ करते थे और प्रत्येक वार्ड से दो-दो पार्षद चुने जाते थे। उस समय कांग्रेस पार्टी ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी ओर निर्दलियों समेत अन्य दलों के पार्षद के सहयोग से बथवाल मेयर चुने गए। उनका कार्यकाल 1994 तक रहा। इसके बाद मेयर, जनता द्वारा चुने जाने लगे। तब जनता द्वारा पहले मेयर के तौर पर राजेंद्र शर्मा का निर्वाचन किया गया था।
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दल नहीं देखा, सभी को मिलाकर चलते थे पवन बथवाल
भाजपा ओबीसी मोर्चा के उपाध्यक्ष चिरंजीवी चौरसिया ने कहा कि पवन बथवाल ने कभी दल नहीं देखा। वह सभी को मिलाकर चलते थे। उनकी सहजता को ही देखते हुए भाजपा हो या सपा, सभी दलों के पार्षदों ने उनका पूरा सहयोग किया। पवन बथवाल के ही समय सुबाष चंद बोस नगर, विलंदपुर खत्ता और जनप्रिय विहार में नगर निगम ने भूखंड विकसित किए जहां आज हजारों की संख्या में घर बन गए हैं। चूंकि नगर महापालिका के बाद पहली बार नगर निगम का गठन हुआ था। बहुत संसाधन नहीं थे। कर्मचारियों का भी अभाव था। थोड़ा अनुभव की भी कमी थी। मगर उस समय मौजूद संसाधनों के साथ पवन बथवाल ने शहर के विकास के लिए तमाम कार्य किए।
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कभी लगा नहीं कि दूसरे दल के मेयर हैं पवन
वार्ड नंबर 24 रेलवे डेयरी कॉलोनी के पूर्व पार्षद अमिता शर्मा ने कहा कि एक बार भाजपा के पार्षदों ने मेयर पवन बथवाल से अनुरोध किया कि निगम के सदन में पार्टी के सभी पार्षदों को एक साथ बैठाया जाए। इधर मांग हुई और पवन बथवाल ने भाजपा के सभी 16 पार्षदों की कुर्सियां सदन में एक साथ लगवा दी। ऐसे कई उदाहरण है जो पवन बथवाल की सहजता को प्रदर्शित करते हैं। वह मेहनती और अच्छे विचारों वाले मेयर रहे। सभी को साथ लेकर चलते थे। योजनाओं में सभी की राय मांगते थे चाहे वह किसी भी दल का पार्षद हो। पार्षदों का भी उन्हें पूरा सहयोग मिलता था। शहर के सबसे बड़े पार्क के तौर पर लाल डिग्गी पार्क का निर्माण, उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। उस समय एक परिवार सा लगता था।