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Gorakhpur News: 17 लाख रुपये के पंचायत में नपे कोतवाल, लाइनहाजिर

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पंचायत के लिए आए दोनों पक्ष ने कर लिया विवाद, पुलिस को भांजनी पड़ी थी लाठी
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एसएसपी ने सीओ को सौंपी थी जांच, रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दो लोगों के बीच 17 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में कोतवाली थाने में पंचायत और गेट पर विवाद होने के मामले में प्रभारी निरीक्षण विमलेश कुमार की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें पुलिस लाइंस भेज दिया गया। एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ को सौंपी थी। अब रिपोर्ट आने के बाद लाइनहाजिर कर विभागीय जांच का आदेश दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, खूनीपुर के रहने वाले सलमान व तारिक के बीच में 17 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद है। इस मामले में कार्रवाई करने की जगह एक सप्ताह से कोतवाली थाने में इसकी पंचायत चल रही थी। यहीं से थाने की भूमिका संदिग्ध हो गई थी। आरोप है कि सलमान ने रुपये लिए और थाने में पंचायत के बाद 10 लाख रुपये तारिक को लौटा दिए। शेष सात लाख रुपये लौटाने के लिए वह चार महीने का समय मांग रहा था। दूसरे पक्ष के लोग इस पर तैयार नहीं थे।
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कहासुनी होने के बाद दोनों पक्ष के लोग पहले कोतवाली थाने पहुंचे और पुलिसकर्मियों ने फिर समझौता करा दिया। लेकिन सोमवार की शाम एक बार फिर दोनों पक्ष के लोग थाने पहुंच गए और गेट पर ही विवाद हो गया था। पुलिस को मामला शांत करने के लिए लाठियां भांजनी पड़ी थी। बाद में पुलिस ने छह लोगों का शांतिभंग में चालान करने के साथ ही आठ बाइक को सीज कर दिया था।
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एसएसपी ने घटना को गंभीरता से लिया था। इसकी बड़ी वजह थाने के सामने का विवाद होना था। एसएसपी डाॅ. गौरव ग्रोवर ने एएसपी/सीओ कोतवाली अंशिका वर्मा को जांच सौंपी थी। एएसपी की रिपोर्ट में कोतवाल विमलेश कुमार प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने कार्रवाई कर दी।
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