बड़हलगंज क्षेत्र के खखाईचखोर विद्युत उपकेंद्र का सपना 16 साल बाद भी अधूरा है। वर्ष 2010 में करीब दो करोड़ 65 लाख रुपये की अनुमानित लागत से शुरू हुआ निर्माण आज भी अधर में लटका है। इसे महज एक साल में तैयार करना था लेकिन विभागीय लापरवाही और कार्यदायी संस्था की सुस्ती के कारण अब उपकेंद्र तैयार नहीं हो सका है।
इसके चलते 50 गांव के लोगों को लो वोल्टेज, फाल्ट से जूझना पड़ रहा है। वर्तमान में उपकेंद्र का भवन झाड़-झंखाड और छुट्टा पशुओं का अड्डा बनकर रह गया है।बड़हलगंज, गोला और गगहा ब्लॉक क्षेत्र के बांगर इलाके के गांवों को चैनपुर, अहिरौली और मझगावां उपकेंद्रों से बिजली मिलती है।
फीडर पर दबाव होने के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित रहती है और ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है। बिजली निगम के अधिकारी के मताबिक, कार्यदायी संस्था अनुबंध के अनुसार कार्य को पूरा नहीं कर सकी, जिसके बाद उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया गया।
शुरू हुआ काम, फिर थम गई रफ्तार :
बिजली निगम ने वर्ष 2010 में खखाईचखोर गांव में नया उपकेंद्र बनाने की योजना बनाई थी। शासन से मंजूरी मिलने के बाद धनराशि जारी हुई और लखनऊ की एसपी ब्राइट फर्म को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। दिसंबर 2010 में निर्माण कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि जल्द ही बिजली संकट खत्म होगा, लेकिन भवन निर्माण के बाद काम ठप हो गया।
समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जिम्मेदारों ने ठेकेदार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीण योगेंद्र शुक्ला,आधा राम यादव, सुरेश प्रसाद, दीपक यादव,रमेश मौर्या, रामराज मोर्या, मनोज निषाद आदि ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अगर सुविधा नहीं मिल रही है तो यह गंभीर लापरवाही है। लोगों ने मांग की है कि अधूरे उपकेंद्र का निर्माण तत्काल पूरा कराकर क्षेत्र की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।