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गोरखपुर चिड़ियाघर का केसरी: बाड़े में खूब ठाट-बाट... फिर भी जंगल वापसी की छटपटाहटी- बढ़ी निगरानी

Wed, 26 Feb 2025 03:01 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो

सार

शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में पीलीभीत से भारी भरकम बाघ सितंबर में लाया गया था। उसके व्यवहार में परिवर्तन और स्वस्थ रखने के लिए 20 जनवरी को बाड़े में छोड़ा गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘’केसरी’’ नाम देकर बाड़े में छोड़ा था।
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बाड़े में शांत बैठा बाघ केसरी। - फोटो : स्रोत: चिड़ियाघर
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विस्तार
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चिड़ियाघर में रह रहे पीलीभीत के बाघ केसरी को बाड़े में ठाट-बाट पसंद नहीं आ रहा है। उसे जंगल की याद सता रही है। इसी छटपटाहट में वह आसपास किसी को न देख बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। उसने नाइटसेल का सीसीटीवी कैमरा भी तोड़ दिया है।

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शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में पीलीभीत से भारी भरकम बाघ सितंबर में लाया गया था। उसके व्यवहार में परिवर्तन और स्वस्थ रखने के लिए 20 जनवरी को बाड़े में छोड़ा गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘’केसरी’’ नाम देकर बाड़े में छोड़ा था।

क्रॉल में यूं तो केसरी आराम से बैठा रहता है और दूसरे बाघों की तुलना में कम चहलकदमी करता है। लेकिन कीपर या दूसरे किसी व्यक्ति को न देखने पर बाहर निकलने की कोशिश करता है। कई बार क्रॉल की पाइप को पकड़कर तोड़ने की कोशिश करता है, लेकिन मजबूत होने की वजह से सफलता नहीं मिलती।
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उप निदेशक और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि केसरी को चिड़ियाघर के माहौल में ढालने के लिए उसे क्राॅल और बाड़े में ज्यादा समय के लिए छोड़ा जा रहा है। जितना देर यह रहेगा उतना दूसरे वन्यजीवों को देखेगा और यहां के माहौल को समझेगा। केसरी की निगरानी बढ़ाई गई है।

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