वाहन चेकिंग के दौरान व्यापारी से 50 लाख रुपये छीनने के आरोपी दरोगा आलोक सिंह के साथियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट से एनबीडब्ल्यू जारी तो करा लिया, लेकिन फरार तीनों आरोपियों को खोजने में पसीना छूट रहा है।
अब तक आरोपियों की लोकेशन कभी लखनऊ तो कभी दिल्ली मिल रही थी। पुलिस का कहना है कि अब अचानक तीनों ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया है, जिससे लोकेशन नहीं मिल रही है। गिरफ्तारी के लिए बनाई गई टीम को अब लोकेशन मिलने का इंतजार है।
सूत्रों के अनुसार, तीनों आरोपियों की तलाश पुलिस गोपनीय ढंग से कर रही है। एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद भी पुलिस उनके नामों का खुलासा नहीं कर रही है। हालांकि, आरोपियों को पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी मिलती जा रही है।
यही वजह है कि पुलिस की सख्ती देख आरोपियों ने अब मोबाइल फोन बंद कर कहीं सुरक्षित ठिकाना तलाश लिया है। साथ ही उन्हें बचाने के लिए राजनीतिक दबाव भी पुलिस पर पड़ने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपियों को दिलासा दिया जा रहा है कि मामला ठंडा होने तक वह गोरखपुर से दूरी बना लें और किसी से भी संपर्क ना करें। आगे चलकर सब मैनेज हो जाएगा।
नौ अप्रैल को दरोगा भेजा गया था जेल
कोतवाली पुलिस ने नौ अप्रैल को चौकी इंचार्ज आलोक सिंह और उसके साथी प्रिंस श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर दोनों को जेल भिजवाया था। दरोगा पर आरोप है कि तीन अप्रैल की सुबह चेकिंग के दौरान व्यापारी नवीन कुमार श्रीवास्तव से 50 लाख रुपये छीन लिए थे।
व्यापारी की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर 44 लाख रुपये बरामद कर लिए। छह लाख रुपये अभी बरामद नहीं किए जा सके हैं। व्यापारी ने तहरीर में चौकी इंचार्ज आलोक सिंह और प्रिंस को नामजद किया था जबकि तीन अन्य को उनका साथी बताया था।