आयकर विभाग की लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर की संयुक्त टीम ने मंगलवार की सुबह निबंधन कार्यालय पहुंचकर बीते तीन साल में हुई रजिस्ट्री की जांच शुरू की। आशंका जताई जा रही है कि कुछ बड़े निवेश वाली रजिस्ट्री में रियल एस्टेट कारोबारियों ने अपनी रकम छिपाई है और लेन-देन में गलत पैन नंबर डालकर आयकर की चोरी की है।
अब तक की जांच में लखनऊ में रहने वाले गोरखपुर के 10 से ज्यादा रईसों के नाम सामने आए हैं, जल्द ही टीम इनसे पूछताछ कर सकती है। देर शाम तक चली जांच में टीम ने शहरी क्षेत्र में हुई रजिस्ट्री के दस्तावेजों को खंगाला और रिकॉर्ड पैन ड्राइव में जुटाए।
मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे आयकर विभाग की टीम निबंधन कार्यालय पहुंच गई। टीम के अचानक पहुंचने से निबंधन कार्यालय में हड़कंप मच गया। टीम के कुल आठ सदस्यों ने निबंधन कार्यालय, द्वितीय में दस्तावेजों की जांच पड़ताल शुरू की। वर्ष 2022-23, 2023-24 और वर्ष 2024-25 में गोरखपुर शहर क्षेत्र में ज्यादा निवेश वाली रजिस्ट्री का डेटा खंगाला।
जानकारी के मुताबिक, टीम को लखनऊ इन्वेस्टिगेशन विंग से रियल एस्टेट में निवेश करने वाली कुछ फर्मों की सूची उपलब्ध कराई गई है जिसमें शक है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में गलत पैन नंबर दर्ज कराए गए हैं। ऐसी रजिस्ट्री कराने वालों के बैंक खातों की जांच के बाद निवेश में हुए लेन-देन के आंकड़ों को छिपाकर कर चोरी की आशंका है। इसी सूची के आधार पर टीम ने देर शाम तक दस्तावेजों का मिलान किया और रिकॉर्ड को पैन ड्राइव में ले लिया।