मान लिया था बंद कर दिया अवैध धंधा, कुंडली खुली तो दूसरा ही सच सामने आया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। 52 मुकदमे, थाने का हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर और गुंडा जैसी कार्रवाई में जेल गया माफिया राकेश यादव पुलिस की नजर में बड़ी खामोशी से किसान बन गया था। उसकी पैठ का आलम यह है कि पुलिस ने पूर्व में उसकी जो कुंडली तैयार की थी, उसमें उसका व्यवसाय किसान दिखाने के साथ ठेका-पट्टा या फिर किसी अवैध धंधे में उसकी भूमिका को खत्म दिखाया गया था। खबर है कि दोबारा जब माफिया की कुंडली तैयार की गई है, तब माफिया राकेश के न सिर्फ अवैध धंधे सामने आए, बल्कि जमीन कब्जा करने के मामले में रंगदारी के केस भी दर्ज किए गए।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने माफिया राकेश यादव की पहले जो जो कुंडली तैयार की थी, उसमें उसके माता, पिता, लड़का, भाई, चाचा, ताऊ और मौसा-मौसी समेत घर के सदस्यों के कुल 15 नाम और मोबाइल नंबर दर्ज है। लूट, डकैती, हत्या और हत्या का प्रयास करने वाले माफिया राकेश यादव का व्यवसाय कृषि लिखा गया है। माफिया गैंग के सदस्य और सहयोगियों की संख्या 10 है। राकेश के खिलाफ गोरखपुर, महाराजगंज, आजमगढ़ और संतकबीर नगर में मुकदमा दर्ज हैं। 6 मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसके गैंग पंजीकरण की कार्रवाई 1997 में की गई थी।
यह पहला माफिया नहीं है, जिसने अपने पैठ का इस्तेमाल कर खुद के शरीफ साबित कर लिया था। इसके पहले माफिया अजीत शाही की कुंडली भी कुछ इसी तरह से सामने आई थी। माफिया अजीत शाही तो नाम बदलकर अजीत वीर विक्रम सिंह बन गया और फिर इस नाम से लखनऊ के पते पर आधार कार्ड भी बनवा लिया था। हालांकि, उसके इस अवैध काम में कौन-कौन से लोग सहयोगी है, उनकी जांच अभी जारी है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि पुलिस सभी माफिया के कारनामों की जांच कर रही है। जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उस पर कार्रवाई भी की जा रही है। आगे भी माफिया के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।