एमएमएमयूटी में शिक्षकों एवं कर्मचारियों का होगा 10 लाख का बीमा स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में लिया गया निर्णय अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी ) अपने सभी स्थाई शिक्षकों और कर्मचारियों का दुर्घटना बीमा कराएगा| यह बीमा 10 लाख रुपये का होगा। यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। स्टीयरिंग कमेटी में लिए गए निर्णय के अनुसार दुर्घटना बीमा के प्रीमियम की राशि का भुगतान विवि करेगा| किसी दुर्घटना की स्थिति में सम्बंधित शैक्षणिक, शिक्षणेत्तर स्टाफ के नामिनी को बीमा राशी मिलेगी| पिछले दिनों अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, नयी दिल्ली ने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले सभी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं को यह आदेश दिया था की वे अपने यहाँ कार्यरत सभी शिक्षकों का अनिवार्य रूप से दुर्घटना बीमा कराएं। इस आदेश के बाद विवि की स्टीयरिंग कमेटी में इस पर विचार विमर्श कर यह निर्णय लिया गया। स्टीयरिंग कमेटी के निर्णय के बाद विवि प्रशासन अब आगे की कार्यवाही करेगा| --- आवेदकों के लिए 100 किमी के दायरे की बाध्यता समाप्त विश्वविद्यालय स्टीयरिंग कमेटी ने यह भी निर्णय लिया कि अंशकालिक पीएचडी पाठ्यक्रम में आवेदकों के गोरखपुर के 100 किमी के दायरे में कार्यरत होने की बाध्यता समाप्त कर दी जाए ताकि अन्य जनपदों में कार्यरत अच्छे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकें| इससे अंशकालिक पीएचडी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता बढ़ेगी और अच्छे लोगों को मौका भी मिल सकेगा| अंशकालिक पीएचडी पाठ्यक्रम में और भी महत्वपूर्ण बदलाव किये गए हैं| अब अंशकालिक पीएचडी पाठ्यक्रम प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्री-पीएचडी कोर्स वर्क विवि में ही करना अनिवार्य नहीं होगा| बल्कि अभ्यर्थी आईआईटी, एनआईटी, या विवि द्वारा अनुमोदित किसी अन्य राष्ट्रीय स्तर के संस्थान या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ऑनलाइन पोर्टल (स्वयं/ एनपीटेल) पर उपलब्ध कोर्स भी कर सकेंगे जिसके क्रेडिट को प्री-पीएचडी कोर्स वर्क के समतुल्य मना जाएगा। --- अंशकालिक पीएचडी में पहले साल एक महीने रहना अनिवार्य अंशकालिक पीएचडी में नए सत्र से प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रथम वर्ष में विवि में न्यूनतम एक महीना रहना अनिवार्य कर दिया है। लेकिन छात्रों को सुविधा होगी की वे विभाग की अनुमति से एक एक हफ्ते कर चार बार में इस अवधि को पूरा कर सकते हैं| द्वितीय वर्ष से छात्र की प्रगति को देखते हुए यह अवधि पंद्रह दिन की भी की जा सकती है| पर प्रगति संतोषजनक न होने पर कोई छूट नहीं मिलेगी| इन सभी बदलावों को विवि की विद्या परिषद् से मंज़ूरी मिलने के बाद इसी सत्र से लागू करने की योजना है|