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शोध में नैतिक तत्व का समावेश ज़रूरी : प्रो. कैलाश

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शोध में नैतिक तत्व का समावेश ज़रूरी : प्रो. कैलाश अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में \"रिसर्च एथिक्स व, साहित्यिक चोरी\" विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। साहित्यिक चोरी विषय वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष डॉ कैलाश अग्रवाल ने पर कहा कि शोध में नैतिक तत्व का समावेश ज़रूरी है। यद्यपि आज टेक्नोलॉजी के सहारे साहित्यिक चोरी को रोकने का कारगर उपाय हो चुका है लेकिन शोध नैतिकता स्वयं ही साहित्यिक चोरी की संभावना को क्षीण कर देती है। महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बरोडा, गुजरात के प्रो विनय राओले ने \" नैतिक जीव वैज्ञानिक अनुसंधान\" पर बात करते हुए सभी शिक्षक गण व छात्र छात्राओं को उत्कृष्ट रिसर्च लेखन की ओर प्रोत्साहित किया और कहा कक इन्टरनेट के इस युग में नवीन सोच, नूतन अनुसंधान व शुद्ध - पवित्र शिक्षा का एक संदेश दिया जाना आवश्यक है। आयोजक वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. वीएन पांडेय ने विषय प्रवर्तन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन की अध्यक्षता प्रो. एस. एन. तिवारी अधिष्ठाता विज्ञान संकाय ने की। आभार ज्ञापन प्रो. पूजा सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी, डॉ. दीपा श्रीवास्तव, डॉ राकेश पांडे एवं डॉ. तूलिका मिश्रा उपस्थित रहीं।
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