2019 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी ने ज्यादातर क्षेत्रों में क्लीन स्वीप की नया कीर्तिमान अपने नाम किया, वहीं वोटरों ने भी अपनी भागीदारी बाखूबी निभाते हुए बूथ तक पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
2019 में हुए चुनाव के दौरान गोरखपुर के लोगों ने भी वोटिंग करने का रिकॉर्ड बनाया, लेकिन छोटे से मार्जिन से वह फर्स्ट डिविजन पास होने से रह गए। वहीं, गोरखपुर से भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे रवि किशन शुक्ल ने तीन लाख से ज्यादा वोटों से जीत तो हासिल कर ली, लेकिन वह गोरखपुर में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीत के अंतर की बराबरी नहीं कर पाए।
सीएम योगी ने 2014 में तीन लाख 12 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था, जबकि रवि किशन तीन लाख एक हजार के वोटों के अंतर से जीते थे। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2009 से लेकर 2024 तक के बीच हुए चार लोकसभा चुनावों में गोरखपुर में सबसे ज्यादा वोटिंग 2019 में ही हुई। वोटिंग के मामले में यह अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग का रिकॉर्ड है।
इससे पहले 50 प्रतिशत मतदाता भी बूथ तक पहुंचकर वोट डालने में परहेज करते आए हैं। मगर, एक बार फिर वोटरों ने निराश करते हुए अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर नया रिकॉर्ड बनाने के बजाए आराम फरमाना बेहतर समझा।
नतीजा यह रहा कि इस बार मतदान का आंकड़ा 2014 में हुए चुनाव के लगभग बराबर पहुंच गया। 2014 में जहां 54.67 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, वहीं इस बार 54.69 प्रतिशत मतदाता ही बूथ तक पहुंचे हैं।
विधानसभा में पिपराइच के मतदाता आगे
गोरखपुर लोकसभा में चुनाव के दौरान विधानसभाओं में हुई वोटिंग के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग 2019 में ही हुई है। इसमें भी पिपराइच के मतदाता वोट डालने में सबसे आगे रहे हैं। यहां पर 2019 में 64 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। जिले में हर बार शहर फिसड्डी साबित हुआ है और हर साल यहां पर पांच विधानसभाओं में सबसे कम वोटिंग दर्ज की गई है।
बांसगांव के मतदाताओं में भी नहीं है उत्साह
बांसगांव विधानसभा की बात करें तो यहां के मतदाताओं में शुरू से ही उत्साह नहीं रहा है। पहले 20-30 प्रतिशत वोट डालने वाले बांसगांव लोकसभा के मतदाता अब 50 प्रतिशत के आंकड़े को छूने लगे हैं, लेकिन इसमें गोरखपुर क्षेत्र के मतदाताओं का योगदान निराशाजनक है।
बांसगांव में गोरखपुर की तीन विधानसभाएं आतीं हैं। इसमें बांसगांव के साथ ही चिल्लूपार और चौरीचौरा है। इन विधानसभाओं में हर चुनाव में सबसे कम वोटिंग दर्ज की जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां 2009 में हुए चुनाव में बांसगांव लोकसभा में महज 39 फीसदी वोट पड़े थे, जबकि 2014 में 49.88 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
2019 में चली मोदी लहर का असर इस लोकसभा में देखने को मिला था और यहां 55.38 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी, लेकिन एक बार फिर यहां के मतदाताओं ने निराश किया और 51.59 फीसदी लोग ही मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पहुंचे।
| विधानसभा |
2024 |
2019 |
2014 |
| कैंपियरगंज |
54.79 |
59.81 |
55.18 |
| गोरखपुर ग्रामीण |
55.49 |
59.39 |
54.42 |
| गोरखपुर शहर |
47.69 |
52.71 |
49.18 |
| पिपराइच |
60.48 |
64.42 |
59.73 |
| सहजनवां |
55.16 |
60.71 |
55.25 |
| बांसगांव - |
46.69 |
49.47 |
47.29 |