- नौ दिन की पूजा अर्चना, 10 वें दिन से जैसे तैसे कर दिया विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नवरात्र में बड़े ही आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना की। विसर्जन के लिए धूमधाम से गाते-बजाते निकले, लेकिन तालाब और पोखरों में आस्था का ही विसर्जन कर दिया। जिस मां की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठता की और उन्हीं की अंतिम विदाई में विधि-विधान को भूल गए। प्रतिमाओं के विसर्जन का तौर तरीका देखकर हर किसी का मन विद्वेलित हो उठा। जिन सामग्रियों की पूजा नौ दिनों तक हुई, वह पैरों तले रौंदकर कूड़े की तरह डाल दी गई। तालाब से प्रतिमाएं खींच कर बाहर निकाले और प्रतिमाओं से आभूषण, चढ़ावे के रुपये लूटने की होड़ मच गई।
राजघाट पुल के पास के तीन पोखरे प्रतिमा विसर्जन के लिए बनाए गए हैं। यहां विभिन्न जगहों से प्रतिमाएं पहुंच रही हैं। मंगलवार से शुरू हुआ सिलसिला बुधवार की देर रात तक जारी रहा। बुधवार की दोपहर 01.50 बजे यहां पर विसर्जन चल रहा था। पोखरों में पटी प्रतिमाओं से साड़ी, गहने, लकड़ी सहित अन्य सामान निकालने की होड़ मची थी। इसी दौरान पिकअप पर प्रतिमा लेकर नाचते गाते युवक पहुंचे। एक विशेष पूजा समिति के ड्रेस में आने वाले युवकों का पूजापाठ से ज्यादा जोर नाचने गाने पर था। तभी अचानक एनाउंस हुआ कि जिन्हें नाचना है आकर नाच ले। फिर एक साल बाद ही मौका मिलेगा। कुछ ने कहा कि पहले आरती तो कर लो। दो मिनट में ही आरती, पूजापाठ की औपचारिकता पूरी करने के भी नाचने गाने में व्यस्त हो गए। करीब आधे घंटे के बाद प्रतिमा को घाट पर ले गए। वहां बने प्लेटफार्म से सीधे पोखरे में गिरा दिया।
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सामानों को लूटने की होड़, कोई निकाल रहा नथिया तो कोई खोज रहे पैसे
नौ दिनों तक दुर्गा प्रतिमाओं की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं ने जैसे तैसे विसर्जन कराया। इसके बाद प्रतिमाओं और कलश सहित अन्य पूजा सामग्री को लूटने की होड़ मच गई। युवक से लेकर बच्चे तक सामानों की तलाश में पोखरे में तैर रहे हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं की साजो सजावट और नथिया निकालने के लिए पहले से ही तय कर ले हैं। इस दौरान कलश, पूजापाठ सामग्री, धर्मिक पुस्तकों सहित अन्य के बीच से रुपये की तलाश भी हो रही है। अमरूतानी के लिए नागेश्वर ने बताया कि लोग सोने की नथिया पहनाते हैं। किसी प्रतिमा में नथिया मिल जाएगी। इस उम्मीद में निकालते हैं। यदि वह आर्टिफिशियल ज्वेलरी निकली तो बच्चे खेलते हैं।पोखरे में 25 से अधिक बच्चे इस पार से उस पार तक तैरते मिले। तो कुछ पोटली में सामान खोजने में मशगूल, आठ साल से लेकर 15 साल तक बच्चों ने बताया कि पैसा खोज रहे हैं। तभी एक लड़की और दो लड़कों में रुपये के बंटवारे को लेकर झगड़ा हो गया। लड़की ने कहा कि 15 रुपये मिले हैं। तुम दो रुपया ही दे रहे हैं। बच्चों की कहासुनी होते देखकर वहां पहुंचे एक व्यक्ति ने हस्तक्षेप करके लड़की को पांच रुपये दिलाए।
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कूड़ा की तरह निकाला जा रहा अवशेष, 10 रुपये में बिकेगी गगरी
विसर्जन स्थल पर नगर निगम की जेसीबी और अवशेष उठाने के लिए गाड़ियां लगी हैं। पोखरा भरने पर जेसीबी चालक लकड़ी सहित अन्य सामान निकालकर बाहर रख दे रहे हैं। उसके बाहर निकलते ही फिर से उपयोगी सामानों की तलाश शुरू हो जा रही है। कुछ लोग सामानों को बेचने के लिए इकट्ठा करते हैं तो कुछ लोग घर ले जाकर उपयोग करते हैं। पोखरे पर कलश इकट्ठा कर रहे अमरूद मंडी में रहने वाले किबुल इस्लाम ने बताया कि वह रात से करीब तीन सौ कलश गगरी निकालकर ले जा चुका है। इसे वह 10 रुपये में बेच रहा है। दुर्गा प्रतिमा से कपड़े उठा रही बहरामपुर की मेवाती ने कहा कि साफ सुथरेे कपड़े हैं। इससे तकिया का खोला ओर ओढ़ना बना लिया जाता है। कुछ महिलाएं और बच्चे बांस सहित ढांचा का अन्य सामान लेकर जाते नजर आए।
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चारों और फैला पूजापाठ का सामान, आस्था के नाम पर खिलवाड़
मां दुर्गा की प्रतिमाओं संग लोग पूजन सामग्री, देवी देवताओं की मूर्ति और धार्मिक पुस्तकें ले जा रहे हैं। विसर्जन के बाद प्रतिमा के साथ सारा सामान कूड़े की तरह फैल जा रहा है। नौ दिनों तक जिनकी पूजा हुई है। उनको पैरों से रौंदकर लेाग कूड़ा में डाल में रहे हैं। इनमें धार्मिक पुस्तकें, अन्य देवी देवताओं की छोटी प्रतिमाएं, पूजन सामग्री सहित अन्य शामिल हैं।
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गुरु गोरक्षनाथ घाट पर फैला कचरा, एक ओर पूजापाठ दूसरी ओर अपमान
बड़ी प्रतिमाओं को जहां पोखरों में ले जाया जा रहा है। वहीं पर छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन गुरु गोरक्षनाथ घाट पर किया जा रहा है। दोपहर 03.16 बजे प्रतिमा का विसर्जन कराने श्रद्धालु पहुंचे। यहां पूजापाठ के बाद पुरुषों ने नदी में ले जाकर प्रतिमा को प्रवाहित किया। यहां पर एक ओर पूजापाठ चल रहा था। तो दूसरी ओर पूजन सामग्री का अवशेष घाट पर फैला नजर आया।
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शास्त्रों में विसर्जन की यह है प्रक्रिया
प्रतिमा विसर्जन से जुड़े लोगों का कहना है कि शास्त्रीय विधि के अनुसार मूर्ति, पंच महाभूतों से बनी होती है। इसलिए इसे पंच महाभूतों में विलीन कर देना ही मूर्ति विसर्जन कहलाता है। शास्त्रों में इसकी प्रक्रिया है। प्रतिमा चाहे दुर्गा की हो या गणेश की। उसे पानी में लेकर उतरते हैं। फिर धीरे धीरे जल में अर्पित कर देते हैं। विसर्जन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मूर्ति खंडित न हो। प्रतिमा के खंडित होने पर शुभ नहीं माना जाता है।