एम्स में इलाज कराने आए हैं तो अपने साथ किसी ऐसे जानकार को लेकर आइए जो इस संस्थान के बारे में सब कुछ जानता हो। वरना दिन भर भटकते रह जाएंगे। पर्ची कटाने से लेकर ओपीडी और जांच तक के लिए इतने चक्कर लगाने होते हैं कि अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो पूरा दिन भटकना पड़ेगा।
कई मरीज जानकारी के अभाव में गलत लाइन में घंटों खड़े रहने के बाद काउंटर से लौटाए जाते हैं। सही जगह पहुंचने पर ओपीडी फुल हो जाने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ता है।
मंगलवार को सुबह से ही ओपीडी मरीजों से भरा रहा। पूरे दिन 3849 मरीजों ने डॉक्टर को दिखाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। इसके लिए लंबी लाइन में लगकर घंटों खड़ा रहना पड़ा। लेकिन दूर दराज से आए कई ऐसे भी मरीज थे, जिन्हें पर्चा बनवाने की सही जानकारी नहीं होने के कारण गलत लाइन में लग गए थे।
काफी इंतजार के बाद एक काउंटर से दूसरी काउंटर पर जाने के लिए कहा गया। दूसरी लाइन में लगने पर जब तक नंबर आया ओपीडी फुल हो गई थी। मरीजों का कहना है कि पंजीकरण काउंटर के ठीक सामने पूछताछ काउंटर पर बैठे कर्मियों से सही जानकारी नहीं मिल रही है।
गार्ड और अन्य मरीजों से पूछकर मरीज और उनके तीमारदार ओपीडी, पर्चा काउंटर और जांच केंद्रों पर पहुंचते हैं। मरीजों का कहना है कि यहां इलाज कराना आसान नहीं है। पहली बार आने पर दिन भर भटकना पड़ता है। एम्स में इलाज कराने से पहले इसके बारे में जानने वाले किसी रिश्तेदार या परिचित को लेकर आने पर ही सुविधा रहती है।
नहीं तो जांच केंद्रों से लेकर ओपीडी तक जाने में भी समस्या होती है। इस समस्या के कारण मंगलवार को तमाम मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए ही लौट गये। क्योंकि अधिकतर मरीज पहली बार एम्स पहुंचे थे। सही जानकारी नहीं मिलने के कारण कई तो बिना पर्चा बनवाए ही लौट गए।
सोनबरसा की संगीता सुबह नौ बजे ही एम्स पहुंच गई थीं। पूछताछ काउंटर से सही जानकारी नहीं मिलने के काण सुनीता का पर्चा ही नहीं बन पाया। संगीता को न्यूरो विभाग में दिखाने के लिए जाना था। संगीता ने कहा इतने बड़े अस्पताल में कोई कुछ बनाने वाला नहीं है। दिनभर भटकते रह गए।