शहर में जाम की एक वजह व्यस्त इलाकों में अस्पतालों का होना भी है। शहर में हर दिन करीब 15 हजार मरीज बारि से इलाज कराने आते हैं। ऐसे में बेतियाहाता में तो दिनभर जाम की स्थिति रहती है। बेतियाहाता में अब जगह नहीं बची तो तारामंडल क्षेत्र में अस्पताल खुलने लगे हैं।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो एम्स की ओपीडी में हर दिन करीब 2500 मरीज आते हैं। लगभग इतने ही मरीज जिला अस्पताल में, करीब 400 मरीज जिला महिला अस्पताल व लगभग 3500 मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में आते हैं। इस तरह लगभग 9 हजार मरीज केवल सरकारी अस्पतालों में हैं। इसके अलावा करीब 6000 मरीज प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में है।
भालोटिया पूर्वांचल में दवा की सबसे बड़ी मंडी है। इसके नजदीक स्थित बेतियाहाता में इकट्ठा ही दवा और अच्छे डॉक्टर मिल जाते हैं। इसलिए इस इलाके में दिन में चार पहिया वाहन लेकर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
मेडिसिटी में बड़े अस्पताल जाएं, छोटे को मिले पार्किंग
आईएमए के एक्जीक्युटिव मेंबर डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि बाहर से आने वाले मरीज व तीमारदार के लिए बेतियाहाता आना सुगम है। यहां दवा और डॉक्टर भी आसपास मिल जाते हैं। इसलिए साधन विहीन मरीजों के लिए बेतियाहाता सबसे अच्छा विकल्प है। सरकार ने मेडिसिटी की जो योजना बनाई है, वह भी बढि़या है।
जरूरत इस बात की है कि जो बड़े अस्पताल हैं, उन्हें वहां शिफ्ट कर दें और छोटे अस्पताल व ओपीडी के लिए बेतियाहाता में ही रहने दें। इसके अलावा गोलघर की तर्ज पर पार्किंग की व्यवस्था की जाए। जिनके अस्पताल हैं, उन्हें पार्किंग एरिया खुद भी देने की सलाह दें। जो नए डॉक्टर अभी अस्पताल खोल रहे हैं, उन्हें मेडिसिटी में कम रेट पर जमीन दी जाए। जैसे उद्योग के लिए सुविधाएं दे रहे हैं, वैसे ही अस्पतालों के लिए भी सब्सिडी दें।
जबकि, सचिव आईएमए डॉ. अमित मिश्र ने बताया कि मेडिसिटी का विकल्प अच्छा है, लेकिन सारे अस्पतालों को एक साथ एकत्रित कर देने से कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाएंगी। इसके अलावा सारे लोग एक ही जगह इलाज के लिए पहुंच पाएंगे, यह संभव नहीं है। इससे बेहतर यह है कि शहर के चारों तरफ प्रमुख मार्ग के किनारे अस्पतालों के लिए छोटे-छोटे क्षेत्र विकसित कर दिए जाएं। इससे एक तो हर क्षेत्र के लोगों का आना जाना आसान हो जाएगा, दूसरे शहर के अंदर भीड़ भी नहीं लगेगी।